90% मुस्लिम देश इंडोनेशिया में आज भी जीवित है रामायण-महाभारत

Report By: Kiran Prakash Singh

90% मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया में आज भी रामायण और महाभारत की परंपरा जीवित है। पीएम मोदी की यात्रा से दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्ते फिर चर्चा में हैं।

DigitalLiveNews.com | 06-07-2026

90% मुस्लिम देश इंडोनेशिया में आज भी जीवित है रामायण-महाभारत की विरासत

भारत-इंडोनेशिया के रिश्तों की ऐतिहासिक नींव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के दौरे पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, समुद्री सुरक्षा, सांस्कृतिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। भारत और इंडोनेशिया के संबंध हजारों वर्ष पुराने हैं। प्राचीन काल में भारतीय व्यापारियों और नाविकों के माध्यम से हिंदू और बौद्ध संस्कृति इंडोनेशिया पहुंची, जिसने वहां की सभ्यता और संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया।

रामायण और महाभारत आज भी संस्कृति का हिस्सा

दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश होने के बावजूद इंडोनेशिया में रामायण और महाभारत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देखे जाते हैं। देश के कई हिस्सों में इन महाकाव्यों पर आधारित पारंपरिक नृत्य, नाटक और कठपुतली (वायांग) प्रस्तुतियां नियमित रूप से आयोजित होती हैं। राम, सीता, हनुमान, अर्जुन और भीष्म जैसे पात्र आज भी इंडोनेशियाई कला और लोक परंपराओं का अहम हिस्सा हैं।

बाली में हिंदू संस्कृति की विशेष पहचान

इंडोनेशिया के बाली द्वीप में हिंदू आबादी सबसे अधिक है। यहां की धार्मिक परंपराएं, मंदिर और त्योहार पूरी दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हालांकि पूरे इंडोनेशिया में हिंदुओं की आबादी लगभग 2 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है। सरकार भी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए रामायण और महाभारत से जुड़े कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करती है।

संस्कृत और भारतीय संस्कृति की गहरी छाप

इंडोनेशिया की आधिकारिक भाषा बहासा इंडोनेशिया में आज भी संस्कृत के अनेक शब्द प्रचलित हैं। इतिहास में श्रीविजय और मजापहित जैसे साम्राज्यों पर भारतीय संस्कृति का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिलता है। यही कारण है कि दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंध आज भी मजबूत बने हुए हैं। दशहरा के अवसर पर आयोजित रामायण मंचन में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के कलाकार भाग लेते हैं, जो सांस्कृतिक समन्वय का अनूठा उदाहरण माना जाता है।

पीएम मोदी की यात्रा से रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भगवान शिव को समर्पित प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार, समुद्री सहयोग, डिजिटल तकनीक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत वर्ष 2027 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा की 100वीं वर्षगांठ भी मनाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक संबंधों को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को भी मजबूत करेगा।


Published By: DigitalLiveNews.com
Date: 06-07-2026

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