ग्राम प्रधान प्रशासक नियुक्ति पर हाईकोर्ट में आज अहम सुनवाई

Report By: Kiran Prakash Singh

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आज हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में सुनवाई होगी। सरकार से मांगा गया जवाब।

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के आदेश पर आज हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

Digital Live News | 03 जून 2026

राज्य सरकार के आदेश को दी गई है चुनौती

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के राज्य सरकार के आदेश को लेकर दायर जनहित याचिका पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी। इस मामले ने प्रदेश की पंचायत राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में नई बहस छेड़ दी है। याचिका में सरकार के 25 मई के आदेश को चुनौती देते हुए इसे कानून के विरुद्ध बताया गया है।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया था। कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता को निर्देश दिया था कि वह सरकार से समुचित दिशा-निर्देश प्राप्त कर अगली सुनवाई में अपना पक्ष स्पष्ट करें। इसी क्रम में आज होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि सरकार का निर्णय पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है और इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों के कार्यकाल को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 का दिया गया हवाला

याचिका में पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि किसी भी ग्राम प्रधान का कार्यकाल उसके शपथ ग्रहण की तिथि से केवल पांच वर्ष तक ही सीमित होता है। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद उसका कार्यकाल स्वतः समाप्त माना जाता है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराए गए तो इसका आधार बनाकर वर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करना कानून की भावना के विपरीत है। इससे उनका कार्यकाल अनिश्चितकाल तक बढ़ सकता है, जो कि विधिक रूप से उचित नहीं माना जा सकता।

पहले अधिकारियों को बनाया जाता था प्रशासक

याचिका में यह भी कहा गया है कि पूर्व में जब किसी कारणवश पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाते थे, तब संबंधित खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अथवा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया जाता था।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इस बार भी उसी परंपरा और व्यवस्था का पालन किया जाना चाहिए था। इसके बजाय वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया गया, जिससे निष्पक्ष प्रशासन और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आज की सुनवाई पर टिकी हैं सभी की निगाहें

आज होने वाली सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है। यदि हाईकोर्ट सरकार के आदेश पर कोई अंतरिम टिप्पणी या निर्देश जारी करता है तो उसका सीधा प्रभाव प्रदेश की पंचायत व्यवस्था पर पड़ सकता है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस मामले को लेकर विशेष रुचि देखी जा रही है। पंचायत चुनावों की समयबद्धता, निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकार और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे इस सुनवाई से जुड़े हुए हैं।

अब सभी की नजरें हाईकोर्ट लखनऊ बेंच पर हैं, जहां आज इस मामले पर आगे की सुनवाई होगी। अदालत के निर्णय और सरकार के जवाब के आधार पर आने वाले दिनों में पंचायत प्रशासन से जुड़ी स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

Digital Live News आपको इस महत्वपूर्ण मामले की हर अपडेट सबसे पहले उपलब्ध कराता रहेगा।

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