
Report By: Kiran Prakash Singh
आजम खान को 2 साल की सजा मिलने के बाद BJP ने कहा कि सरकारी अधिकारियों पर अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के लिए यह बड़ा सबक है।
आजम खान पर कोर्ट के फैसले के बाद BJP का हमला तेज
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता Azam Khan को विवादित बयान मामले में 2 साल की सजा मिलने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। रामपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट के फैसले को बीजेपी नेताओं ने “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि यह उन नेताओं के लिए बड़ा सबक है जो चुनावी मंचों से सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं।
साल 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए बयान को लेकर अदालत ने आजम खान को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने कानून की चार अलग-अलग धाराओं के तहत उन्हें दो-दो साल की सजा सुनाई और प्रत्येक धारा में 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना ने क्या कहा?
रामपुर से बीजेपी विधायक Akash Saxena ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संदेश है।
उन्होंने कहा, “जो नेता जनता की तालियां बटोरने के लिए सरकारी अधिकारियों को अपमानित करते हैं, उनके लिए यह फैसला सबक है।”
आकाश सक्सेना ने आगे कहा कि कई नेता यह भूल जाते हैं कि कानून सबके लिए समान है और जो नियम दूसरों पर लागू होते हैं, वही उन पर भी लागू होते हैं। उन्होंने अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए न्यायपालिका पर भरोसा जताया।
क्या था पूरा विवाद?
यह मामला 2019 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक भाषण से जुड़ा है। वायरल वीडियो में आजम खान जिला प्रशासन के अधिकारियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते नजर आए थे।
उनका बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद चुनाव आचार संहिता उल्लंघन और भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनके बयान से सरकारी कर्मचारियों का अपमान हुआ और चुनावी माहौल में तनाव बढ़ सकता था। बाद में पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
वकीलों ने फैसले को लेकर क्या कहा?
एडवोकेट संदीप सक्सेना ने बताया कि अदालत ने चारों धाराओं में दो-दो साल की सजा सुनाई है। उन्होंने कहा कि मामला सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भड़काऊ और अपमानजनक टिप्पणी से जुड़ा था।
वहीं एडवोकेट स्वदेश शर्मा ने कहा कि घटना के समय चुनाव आचार संहिता लागू थी और इससे पहले भी आजम खान पर 48 घंटे और 72 घंटे के प्रचार प्रतिबंध लगाए जा चुके थे।
उन्होंने बताया कि लिखित माफी देने के बावजूद आजम खान ने दोबारा उसी तरह का बयान दिया, जिसके बाद उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया।
अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 8 गवाह पेश किए गए थे और वीडियो साक्ष्य भी शामिल किया गया था।
वीडियो सबूत बना बड़ा आधार
मामले की सुनवाई के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग को अहम सबूत माना गया। अदालत में पेश वीडियो की सत्यता को आरोपी पक्ष की ओर से चुनौती नहीं दी गई।
गवाहों ने भी अदालत में प्रत्यक्षदर्शी के तौर पर बयान दिए। जांच अधिकारी ऋषिपाल सिंह ने मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके आधार पर सुनवाई आगे बढ़ी।
अदालत ने माना कि भाषण सार्वजनिक मंच से दिया गया था और उसकी सामग्री चुनावी माहौल में भड़काऊ प्रभाव डाल सकती थी। इसी आधार पर अदालत ने दोषसिद्धि और सजा का फैसला सुनाया।
फैसले के बाद बढ़ी राजनीतिक बहस
कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। बीजेपी इसे कानून की जीत बता रही है, जबकि समाजवादी पार्टी समर्थक इसे राजनीतिक कार्रवाई करार दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का असर आने वाले चुनावों और आजम खान की राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आजम खान इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे या नहीं।