यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर बाउंसर तैनात, बढ़ी सख्ती

Report By: Kiran Prakash Singh

यमुनोत्री धाम यात्रा मार्ग पर बिना टोकन घोड़ा-खच्चर संचालकों को रोकने के लिए बाउंसर तैनात किए गए हैं। फैसले पर विवाद भी शुरू हो गया है।

यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर बाउंसरों की एंट्री, प्रशासन की नई व्यवस्था चर्चा में

उत्तराखंड में स्थित प्रसिद्ध Yamunotri Temple धाम की यात्रा इस बार एक नई वजह से चर्चा में है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर चार बाउंसर तैनात किए हैं। इन बाउंसरों का काम बिना टोकन के चलने वाले घोड़ा-खच्चर संचालकों और डंडी-कंडी मजदूरों को नियंत्रित करना बताया जा रहा है।

करीब 5 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर इस नई व्यवस्था को लेकर अब बहस शुरू हो गई है। प्रशासन इसे व्यवस्था बनाए रखने का जरूरी कदम बता रहा है, जबकि कुछ स्थानीय लोग इसे धार्मिक माहौल के खिलाफ मान रहे हैं।

बढ़ती भीड़ से बढ़ी चुनौती

यमुनोत्री धाम यात्रा सीजन में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भी यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। श्रद्धालुओं के साथ-साथ घोड़ा-खच्चर संचालक, कुली, डंडी-कंडी मजदूर और अन्य श्रमिकों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है।

भीड़ बढ़ने के साथ कई बार अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है। आरोप है कि कुछ संचालक रोटेशन सिस्टम तोड़कर बिना अनुमति यात्रियों को ले जाने की कोशिश करते हैं, जिससे विवाद और धक्का-मुक्की जैसी घटनाएं सामने आती हैं।

इसी समस्या से निपटने के लिए जिला पंचायत की कुली एजेंसी ने इस बार बाउंसरों की मदद लेने का फैसला किया है।

चार बाउंसरों को मिली जिम्मेदारी

प्रशासन की ओर से तैनात किए गए चार बाउंसर यात्रा मार्ग के भीड़भाड़ वाले हिस्सों में निगरानी कर रहे हैं। उनका मुख्य काम यह सुनिश्चित करना है कि केवल वैध टोकन या पर्ची रखने वाले संचालक ही श्रद्धालुओं को लेकर आगे बढ़ें।

बिना टोकन वाले संचालकों को रास्ते में ही रोककर वापस भेजा जा रहा है। इससे यात्रा व्यवस्था को नियंत्रित करने और यात्रियों की सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

तैनात बाउंसर आकाश राठौर ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल नियमों का पालन करवाना है, ताकि किसी प्रकार की मारपीट या विवाद की स्थिति पैदा न हो।

स्थानीय लोगों ने जताया विरोध

हालांकि इस नई व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी भी सामने आ रही है। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि यमुनोत्री जैसे धार्मिक और शांत क्षेत्र में बाउंसरों की तैनाती उचित नहीं है।

स्थानीय निवासी संदीप राणा का कहना है कि यात्रा मार्ग पर पहले से ही पुलिस और Indo-Tibetan Border Police यानी ITBP के जवान मौजूद हैं। ऐसे में अलग से बाउंसर लगाने की जरूरत नहीं थी।

उनका आरोप है कि इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच भय का माहौल बन रहा है और पहाड़ की पारंपरिक शांति प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रशासन से यह फैसला वापस लेने की मांग की है।

कुछ लोगों ने बताया जरूरी कदम

दूसरी ओर कई लोग इस व्यवस्था का समर्थन भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यात्रा सीजन के दौरान भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि कई बार नियंत्रण मुश्किल हो जाता है।

समर्थकों का मानना है कि बाउंसरों की मौजूदगी से नियमों का पालन बेहतर तरीके से हो रहा है और झगड़े या अव्यवस्था की घटनाओं में कमी आएगी।

प्रशासन भी इसे सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहा है। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षित यात्रा उनकी पहली प्राथमिकता है।

चर्चा का विषय बनी नई व्यवस्था

यमुनोत्री धाम में बाउंसरों की तैनाती अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुकी है। एक तरफ प्रशासन इसे आधुनिक प्रबंधन और अनुशासन की जरूरत बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसे धार्मिक स्थल के माहौल के खिलाफ मान रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस व्यवस्था को जारी रखता है या स्थानीय विरोध को देखते हुए इसमें बदलाव करता है। फिलहाल यात्रा मार्ग पर बाउंसरों की मौजूदगी श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।

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