उमर अब्दुल्ला बोले, J&K का राज्य दर्जा दिल्ली नहीं तय करेगी

Report By: Kiran Prakash Singh

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर J&K के राज्य दर्जे को शांति की शर्त से जोड़ा गया तो इसका फैसला नई दिल्ली नहीं, पाकिस्तान में होगा।

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उमर अब्दुल्ला का J&K राज्य दर्जे पर बयान, विधानसभा में पाकिस्तान का जिक्र

Digital Live News | 28 सितंबर 2026 | digitallivenews.com

जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के एक बयान से राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब्दुल्ला ने विधानसभा में कहा कि अगर राज्य का दर्जा बहाल करने को जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद पूरी तरह खत्म होने की शर्त से जोड़ा जाता है, तो इसका फैसला नई दिल्ली में नहीं बल्कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होगा।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर प्रस्ताव पेश किया गया है। 25 सितंबर को मुख्यमंत्री ने विधानसभा में केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने का आग्रह किया था।

1. उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में क्या कहा?

उमर अब्दुल्ला ने अपने बयान में कहा कि उनकी सरकार के प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 या विशेष दर्जे की बहाली की मांग शामिल नहीं है। उन्होंने विधायकों से ऐसे संशोधनों पर जोर नहीं देने की अपील की, जिनका इस्तेमाल राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव के खिलाफ किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिक मांग पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की है। विधानसभा में पेश प्रस्ताव में भी केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने का आग्रह किया गया है।

2. पाकिस्तान और इस्लामाबाद का जिक्र क्यों आया?

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए यह शर्त रखी जाती है कि पहले जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह शांति स्थापित हो और उग्रवाद समाप्त हो, तो ऐसी स्थिति में फैसला भारत के राजनीतिक नेतृत्व के बजाय पाकिस्तान में होने जैसी स्थिति बन जाएगी।

यह टिप्पणी उमर अब्दुल्ला का राजनीतिक तर्क है। इसका मतलब यह नहीं है कि जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे पर फैसला करने का कोई औपचारिक अधिकार पाकिस्तान को प्राप्त है।

भारत के आधिकारिक रुख के अनुसार जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है। अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में पुनर्गठित किया था।

3. राज्य दर्जे की बहाली पर विधानसभा में प्रस्ताव

25 सितंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पेश किया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया गया।

इस प्रस्ताव को लेकर विधानसभा में भाजपा विधायकों ने विरोध भी किया। विवाद खास तौर पर प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव और नवंबर 2024 में पारित प्रस्ताव के संदर्भों को लेकर सामने आया। भाजपा ने इन संदर्भों पर आपत्ति जताई।

4. सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ी राजनीतिक बहस

जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार लगातार इसकी बहाली की मांग करती रही है।

दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने विधानसभा में प्रस्ताव के कुछ हिस्सों पर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने प्रस्ताव में पुराने स्वायत्तता संबंधी संदर्भों को लेकर आपत्ति दर्ज की। विधानसभा में दोनों पक्षों के बीच हंगामे के कारण कार्यवाही भी प्रभावित हुई थी।

राज्य के दर्जे की बहाली को लेकर उमर अब्दुल्ला पहले भी केंद्र सरकार के सामने यह मुद्दा उठा चुके हैं। जुलाई 2026 में उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी मांग भारतीय संविधान के दायरे में राज्य का दर्जा बहाल करने की है।

5. केंद्र और जम्मू-कश्मीर के रिश्तों में अहम मुद्दा

जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा फिलहाल केंद्र और निर्वाचित सरकार के बीच प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल है। 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद केंद्र शासित प्रदेश में निर्वाचित सरकार बनी और इसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लगातार उठती रही है।

सितंबर में उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों पर उनकी केंद्र सरकार के साथ बातचीत जारी है, जिनमें राज्य का दर्जा भी शामिल है।

वहीं, जुलाई में उमर अब्दुल्ला ने अपने एक लेख में कहा था कि राज्य का दर्जा बहाल करने की उनकी मांग केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दिए गए आश्वासन और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री की ओर से किए गए सार्वजनिक वादों पर आधारित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि उनकी लड़ाई भारत के संविधान के ढांचे के भीतर है और इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की मांग नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच विधानसभा में उमर अब्दुल्ला की इस्लामाबाद वाली टिप्पणी ने राज्य के दर्जे की बहाली को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और चर्चा में ला दिया है। अब निगाहें केंद्र सरकार के रुख और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में इस मुद्दे पर आगे होने वाली चर्चा पर हैं।

दिनांक: 28 सितंबर 2026
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