
Report By: Kiran Prakash Singh
यूपी में मानदेय बढ़ाने के बाद अब योगी सरकार शिक्षामित्रों की सेवा अवधि 60 से 62 वर्ष करने पर विचार कर रही है। बीएसए से रिपोर्ट मांगी गई।
📅 Date: 23 May 2026
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शिक्षामित्रों को मिल सकती नई राहत, सेवा अवधि बढ़ाने पर मंथन
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार शिक्षामित्रों को एक और बड़ी सौगात देने की तैयारी में नजर आ रही है। हाल ही में मानदेय बढ़ाने के बाद अब सरकार शिक्षामित्रों की सेवा अवधि बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। वर्तमान में शिक्षामित्रों की सेवा अवधि 60 वर्ष निर्धारित है, जिसे बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। इसी मांग को लेकर शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
बीएसए से मांगी गई रिपोर्ट
शासन ने प्रदेश के कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) से शिक्षामित्रों से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसमें शिक्षामित्रों की संख्या, सेवा अवधि, रिक्त पदों और विद्यालयों में उनकी भूमिका से संबंधित जानकारी मांगी गई है। माना जा रहा है कि सरकार इन रिपोर्टों के आधार पर आगे की रणनीति तय करेगी।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार यह जानना चाहती है कि अगर सेवा अवधि बढ़ाई जाती है तो उसका शिक्षा व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही वित्तीय भार और प्रशासनिक पहलुओं का भी अध्ययन किया जा रहा है।
मानदेय वृद्धि के बाद बढ़ी उम्मीदें
कुछ समय पहले योगी सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी कर उन्हें राहत दी थी। इसके बाद अब सेवा अवधि बढ़ाने की चर्चा से शिक्षामित्रों में नई उम्मीद जगी है। शिक्षामित्र संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था संभाली है और प्राथमिक विद्यालयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनकी सेवा अवधि बढ़ाना न्यायसंगत कदम होगा।
शिक्षामित्र संगठनों ने जताई खुशी
सरकार द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने की खबर सामने आने के बाद विभिन्न शिक्षामित्र संगठनों ने खुशी जाहिर की है। संगठनों का कहना है कि यदि सेवा अवधि 62 वर्ष की जाती है तो हजारों शिक्षामित्रों को लाभ मिलेगा।
संगठनों ने यह भी कहा कि कई शिक्षामित्र आर्थिक रूप से पूरी तरह इसी नौकरी पर निर्भर हैं। ऐसे में सेवा अवधि बढ़ने से उन्हें अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। साथ ही अनुभव का लाभ भी शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा।
विपक्ष भी साध रहा निशाना
हालांकि इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश शुरू कर दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार चुनावी माहौल को देखते हुए शिक्षामित्रों को लुभाने का प्रयास कर रही है। वहीं सरकार समर्थकों का कहना है कि योगी सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए फैसले ले रही है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि प्रदेश में शिक्षामित्रों की बड़ी संख्या को देखते हुए यह फैसला राजनीतिक रूप से भी अहम साबित हो सकता है।
जल्द हो सकता है बड़ा फैसला
शासन स्तर पर चल रही गतिविधियों को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकार इस मुद्दे पर बड़ा निर्णय ले सकती है। फिलहाल सभी की नजर बीएसए की रिपोर्ट और शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
अगर सेवा अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूर होता है तो यह प्रदेश के हजारों शिक्षामित्रों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर अंतिम फैसला कब तक लेती है।