
Report By: Kiran Prakash Singh
आगरा नगर निगम ने शासन के निर्देश पर टोरंट पावर को 431 करोड़ रुपये की राहत दी। फैसले को लेकर विपक्ष और जनता सवाल उठा रही है।
📅 Date: 23 May 2026
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टोरंट पावर को 431 करोड़ की राहत, विपक्ष ने उठाए सवाल
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में टोरंट पावर लिमिटेड को लेकर बड़ा वित्तीय फैसला सामने आया है। आगरा नगर निगम सदन में एक ऐसा प्रस्ताव पेश किया गया, जिसके तहत कंपनी को करीब 431 करोड़ रुपये के बकाए से राहत दे दी गई। बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर लाया गया था। प्रस्ताव पास होने के बाद अब इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।
नगर निगम सदन में पास हुआ प्रस्ताव
आगरा नगर निगम सदन की बैठक में टोरंट पावर से जुड़े बकाए को लेकर प्रस्ताव रखा गया। चर्चा के दौरान अधिकारियों ने शासन के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि कंपनी को राहत देने का निर्णय उच्च स्तर पर लिया गया है। इसके बाद सदन में प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई।
बताया जा रहा है कि यह राशि नगर निगम से जुड़े किराये और अन्य देयों से संबंधित थी। प्रस्ताव पारित होते ही विपक्षी पार्षदों और कई सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए।
विपक्ष ने बताया ‘सरकारी मेहरबानी’
विपक्षी दलों ने इस फैसले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि आम जनता पर बिजली बिल और टैक्स का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जबकि बड़ी कंपनियों को करोड़ों रुपये की राहत दी जा रही है।
कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे “कारपोरेट पर मेहरबानी” बताते हुए कहा कि अगर जनता के छोटे बकाए पर सख्ती हो सकती है तो बड़ी कंपनियों को इतनी बड़ी राहत क्यों दी जा रही है। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है।
टोरंट पावर की भूमिका पर चर्चा
आगरा में बिजली वितरण का काम लंबे समय से टोरंट पावर संभाल रही है। कंपनी का दावा है कि उसने शहर की बिजली व्यवस्था में सुधार किया है और लाइन लॉस कम करने में सफलता हासिल की है। वहीं आलोचकों का कहना है कि शहर के कई इलाकों में अब भी उपभोक्ताओं को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इस बीच 431 करोड़ रुपये की राहत मिलने के बाद कंपनी की भूमिका और सरकार के फैसले को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई लोग इसे प्रशासनिक निर्णय बता रहे हैं, जबकि कई इसे राजनीतिक दृष्टि से देख रहे हैं।
जनता के बीच उठ रहे सवाल
शहर में आम लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी रकम माफ करने की जरूरत क्यों पड़ी। लोगों का कहना है कि नगर निगम को पहले से ही वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में करोड़ों रुपये की राहत देने से नगर निगम की आय पर असर पड़ सकता है।
कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा है कि इस फैसले के सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए ताकि जनता को पूरी जानकारी मिल सके।
राजनीतिक मुद्दा बनने के आसार
यह मामला अब धीरे-धीरे राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है। विपक्ष इसे आने वाले समय में बड़ा मुद्दा बना सकता है। वहीं सरकार समर्थकों का कहना है कि फैसला शासन स्तर पर नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बहस होने की संभावना है। नगर निगम और शासन की ओर से यदि विस्तृत जानकारी जारी की जाती है तो तस्वीर और साफ हो सकती है।