हरभजन सिंह ने विराट पर मांजरेकर के बयान को किया खारिज

Report By: Kiran Prakash Singh

विराट कोहली पर बहस: हरभजन सिंह ने मांजरेकर के बयान को बताया निजी राय

विराट कोहली पर संजय मांजरेकर के बयान का हरभजन सिंह ने विरोध किया। हरभजन बोले, कोई भी क्रिकेट फॉर्मेट आसान नहीं होता और विराट हर दौर के शानदार खिलाड़ी हैं।

मुंबई (Digitallivenews)। भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर विराट कोहली को लेकर बहस तेज हो गई है। इस बार चर्चा की वजह बने हैं पूर्व बल्लेबाज संजय मांजरेकर और पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह। दरअसल, मांजरेकर ने हाल ही में कहा था कि विराट कोहली को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास नहीं लेना चाहिए था और उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि विराट एकदिवसीय क्रिकेट इसलिए खेल रहे हैं क्योंकि यह प्रारूप आसान है।

मांजरेकर के इस बयान पर अब हरभजन सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और साफ कहा है कि कोई भी प्रारूप आसान नहीं होता। हरभजन ने कहा कि यह मांजरेकर के निजी विचार हो सकते हैं, लेकिन वह इससे बिल्कुल सहमत नहीं हैं।

हरभजन सिंह ने कहा, “अगर कोई भी प्रारूप आसान होता, तो हर खिलाड़ी उसमें रन बना लेता। किसी भी फॉर्मेट में रन बनाना आसान नहीं है। चाहे टेस्ट हो, वनडे हो या टी20—हर जगह अलग चुनौतियां होती हैं।” उन्होंने आगे कहा कि किसी खिलाड़ी का मूल्यांकन इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि वह कौन सा प्रारूप खेल रहा है।

हरभजन ने विराट कोहली की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि वह एक अविश्वसनीय खिलाड़ी हैं और भारत के लिए लंबे समय से मैच विनर रहे हैं। उन्होंने कहा, “विराट एक प्रारूप खेलें या तीनों, इससे उनकी महानता कम नहीं होती। वह अपने प्रदर्शन से आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करते हैं।”

पूर्व स्पिनर ने यह भी कहा कि विराट कोहली ने एकदिवसीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। “विराट और उनके जैसे खिलाड़ियों ने वनडे क्रिकेट को आगे बढ़ाया है। यह प्रारूप आज भी उतना ही प्रतिस्पर्धी है,” हरभजन ने कहा।

हरभजन सिंह का मानना है कि अगर विराट कोहली आज भी टेस्ट क्रिकेट खेलते, तो वह टीम इंडिया के मुख्य खिलाड़ियों में शामिल होते। उन्होंने कहा कि विराट की क्लास और अनुभव किसी भी प्रारूप में उन्हें खास बनाता है।

वहीं, इससे पहले संजय मांजरेकर ने विराट कोहली को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि विराट ने अपनी तकनीकी कमियों और समस्याओं पर काम करने के बजाय टेस्ट क्रिकेट से दूरी बना ली। मांजरेकर ने यह भी कहा था कि विराट को टेस्ट क्रिकेट को एकदिवसीय से ऊपर रखना चाहिए था।

मांजरेकर ने इंग्लैंड के बल्लेबाज जो रूट का उदाहरण देते हुए कहा था कि जैसे रूट टेस्ट क्रिकेट में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, उसी तरह विराट कोहली भी टेस्ट क्रिकेट में और बेहतर कर सकते थे। उनके मुताबिक, विराट में अब भी टेस्ट क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने की पूरी क्षमता थी।

इस पूरे मामले के बाद क्रिकेट जगत दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है। जहां कुछ लोग मांजरेकर की बात से सहमत हैं, वहीं बड़ी संख्या में पूर्व क्रिकेटर और फैंस हरभजन सिंह के विचारों का समर्थन कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में क्रिकेट के तीनों प्रारूपों का अपना महत्व है और किसी एक प्रारूप को आसान कहना खेल की जटिलताओं को नजरअंदाज करना होगा। विराट कोहली जैसे खिलाड़ी ने हर फॉर्मेट में खुद को साबित किया है और उनका योगदान भारतीय क्रिकेट के लिए अमूल्य रहा है।

कुल मिलाकर, यह बहस सिर्फ विराट कोहली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात पर भी सवाल उठाती है कि क्रिकेट के किसी भी प्रारूप को कमतर आंकना कितना सही है। हरभजन सिंह का बयान यह साफ करता है कि क्रिकेट चाहे किसी भी रूप में खेला जाए, उसमें सफलता पाना हमेशा चुनौतीपूर्ण ही रहता है।

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