
Report By: Kiran Prakash Singh
सरकार ने पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर नया SAED लागू किया है। जानें क्या बढ़ेंगी घरेलू कीमतें और आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा।
पेट्रोल-डीजल एक्सपोर्ट टैक्स में बदलाव, सरकार का बड़ा फैसला; आम जनता पर क्या होगा असर?
देशभर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने अब ईंधन निर्यात शुल्क यानी Special Additional Excise Duty (SAED) में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर नई दरें लागू कर दी हैं। इसके बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल और महंगे होंगे या आम आदमी की जेब पर कोई सीधा असर पड़ेगा?
सरकार की ओर से जारी नई अधिसूचना के मुताबिक ये बदलाव 16 मई 2026 से लागू हो चुके हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि सरकार ने साफ किया है कि इसका असर फिलहाल घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद एक्सपोर्ट टैक्स को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।
क्या हैं नई SAED दरें?
केंद्र सरकार की नई अधिसूचना के अनुसार अब पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर का SAED लगाया गया है। यह पहली बार है जब पेट्रोल एक्सपोर्ट पर इस तरह का शुल्क लगाया गया है।
इसके अलावा डीजल के निर्यात पर अब 16.5 रुपये प्रति लीटर SAED लागू होगा। वहीं विमान ईंधन यानी ATF पर 16 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया है।
सरकार ने फिलहाल तीनों ईंधनों पर Road and Infrastructure Cess (RIC) को शून्य रखा है। यानी अतिरिक्त रोड टैक्स नहीं लगाया गया है। सरकार का कहना है कि ये कदम घरेलू ईंधन आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।
SAED क्या है और सरकार इसे क्यों लगाती है?
SAED यानी Special Additional Excise Duty एक अतिरिक्त शुल्क है, जिसे सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर तय करती है। इसकी समीक्षा आमतौर पर हर दो सप्ताह में की जाती है।
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ जाती हैं, तब भारतीय रिफाइनरियों को निर्यात से ज्यादा मुनाफा मिलने लगता है। ऐसी स्थिति में कंपनियां घरेलू बाजार की बजाय विदेशी बाजार में ज्यादा ईंधन बेचने लगती हैं।
इससे देश में ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाती है ताकि कंपनियां घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता दें। सरकार ने यह व्यवस्था 27 मार्च 2026 से लागू की थी, जब मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया था।
पहले कितनी थीं दरें और अब क्या बदला?
अप्रैल 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं। उस समय सरकार ने डीजल पर SAED बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया था।
इसके बाद 1 मई को वैश्विक बाजार में कुछ नरमी आने पर सरकार ने डीजल पर टैक्स घटाकर 23 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 33 रुपये प्रति लीटर कर दिया।
अब 16 मई को जारी नई अधिसूचना में डीजल पर SAED घटाकर 16.5 रुपये और ATF पर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि सबसे बड़ा बदलाव पेट्रोल को लेकर हुआ है, जिस पर पहली बार 3 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगाया गया है।
क्या आम लोगों की जेब पर पड़ेगा असर?
सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार यह टैक्स केवल निर्यात (Export) पर लगाया गया है, घरेलू बिक्री पर नहीं। यानी देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना है ताकि भविष्य में किसी तरह की कमी या सप्लाई संकट पैदा न हो।
हालांकि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो आने वाले समय में तेल कंपनियां खुदरा कीमतों में बदलाव कर सकती हैं। फिलहाल सरकार ने जनता को राहत देने की कोशिश की है।
मिडिल ईस्ट तनाव और भारत की रणनीति
ईरान-अमेरिका तनाव और मिडिल ईस्ट संकट के चलते वैश्विक तेल बाजार में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए सरकार हर कदम बेहद सावधानी से उठा रही है।
सरकार चाहती है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई बनी रहे और किसी भी हाल में ईंधन संकट पैदा न हो। यही वजह है कि निर्यात शुल्क में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं तो सरकार फिर से SAED दरों में बदलाव कर सकती है। फिलहाल केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचने की कोशिश की जाएगी।