
Report By: Kiran Prakash Singh
पश्चिम बंगाल में राज्यसभा उपचुनाव से पहले सियासत तेज। टीएमसी में टूट के बावजूद ममता बनर्जी की ताकत बरकरार, तीसरी सीट पर दिलचस्प मुकाबले के आसार।
DigitalLiveNews.com | 06-07-2026
पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव: टीएमसी में टूट के बावजूद बरकरार है ममता बनर्जी का राजनीतिक प्रभाव
24 जुलाई को होगा राज्यसभा उपचुनाव
पश्चिम बंगाल की राज्यसभा की तीन रिक्त सीटों के लिए निर्वाचन आयोग ने 24 जुलाई 2026 को उपचुनाव कराने की घोषणा की है। मतदान और मतगणना दोनों एक ही दिन होंगे। इस चुनाव पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं क्योंकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में आंतरिक मतभेदों के बीच यह चुनाव पार्टी की राजनीतिक ताकत और एकजुटता की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
तीन सीटों का गणित, तीसरी सीट पर सबसे बड़ा मुकाबला
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 74 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। मौजूदा विधानसभा गणित के अनुसार भाजपा के पास 207 विधायक हैं, जिससे वह दो सीटें आसानी से जीत सकती है। हालांकि तीसरी सीट के लिए भाजपा को कुल 222 वोटों की जरूरत होगी, जो उसके पास नहीं हैं। ऐसे में तीसरी सीट का मुकाबला बेहद रोचक होने की संभावना है और अन्य दलों के रुख पर सबकी नजर रहेगी।
टीएमसी में मतभेद के बावजूद ममता का प्रभाव कायम
टीएमसी के पास कुल 80 विधायक हैं, लेकिन पार्टी के भीतर दो गुटों की चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज है। ऋतब्रता बनर्जी गुट का दावा है कि उसके साथ करीब 60 विधायक हैं। यदि इस दावे को सही माना जाए, तब भी ममता बनर्जी के साथ लगभग 20 विधायक रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन विधायकों की भूमिका तीसरी सीट के समीकरण बदल सकती है। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी अपने विरोधी गुट के उम्मीदवार का समर्थन करने की संभावना बेहद कम है।
क्या बीजेपी बदलेगी चुनाव का पूरा समीकरण?
भाजपा दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद भी 50 से अधिक वोट बचा सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा अपने अतिरिक्त वोट ऋतब्रता बनर्जी गुट के उम्मीदवार को देगी या तीसरे उम्मीदवार को जिताने की रणनीति बनाएगी। राजनीतिक हलकों में क्रॉस वोटिंग की भी चर्चा है। यदि किसी भी गुट के विधायक पार्टी लाइन से हटकर मतदान करते हैं तो चुनाव परिणाम पूरी तरह बदल सकता है।
अब निगाहें ममता की रणनीति पर
राज्यसभा उपचुनाव केवल तीन सीटों का चुनाव नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर का संकेत भी माना जा रहा है। ममता बनर्जी के सामने अपनी पार्टी के विधायकों को एकजुट रखना और विरोधी गुट को राजनीतिक संदेश देना बड़ी चुनौती होगी। दूसरी ओर भाजपा तीसरी सीट जीतने के लिए हर संभावित राजनीतिक समीकरण पर नजर बनाए हुए है। अब सभी की निगाहें 24 जुलाई के मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हैं, जो बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध राजनीतिक दावों और वर्तमान विधानसभा संख्या बल पर आधारित है। अंतिम परिणाम मतदान, आधिकारिक नामांकन और संभावित राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेंगे।
Published By: DigitalLiveNews.com
Date: 06-07-2026