
Report By: Kiran Prakash Singh
SIR को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, बंगाल और कर्नाटक में वोटर लिस्ट को लेकर विवाद बढ़ा।
दिनांक: 2 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
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SIR पर सियासी घमासान, झारखंड-दिल्ली-महाराष्ट्र में बवाल
SIR को लेकर देशभर में सियासी विवाद
चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर देश के कई राज्यों में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इसके जरिए विपक्ष समर्थक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक से जुड़े आंकड़ों को लेकर विपक्ष ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
विपक्ष का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हो रहा है। वहीं चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कई नाम मृत्यु, स्थान परिवर्तन, अनुपलब्धता या फॉर्म जमा न होने जैसे कारणों से ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं।
झारखंड में मुस्लिम वोटरों के नाम पर सवाल
झारखंड के गोड्डा को लेकर एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट की ओर से फॉर्म-7 के जरिए कुछ मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई। हालांकि, कम से कम चार बूथों पर BLO ने इन आवेदनों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि जिन मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हुई, उनमें कई मुस्लिम मतदाता थे और वे लंबे समय से संबंधित गांवों में रह रहे हैं। कुछ लोगों का 2003 के बड़े वोटर रिविजन के दौरान भी सत्यापन हो चुका था।
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि यदि किसी कार्यकर्ता के कहने पर फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, तो इसकी जांच किस तरह होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के दौरान मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
राहुल गांधी और विपक्ष के आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी SIR को लेकर बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने महाराष्ट्र के 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया।
राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि SIR के दौरान हटाए गए बड़ी संख्या में नाम अपील के बाद वापस जोड़े गए। उन्होंने महाराष्ट्र की ड्राफ्ट लिस्ट में करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के शामिल नहीं होने पर भी सवाल उठाया।
राहुल गांधी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और चुनाव आयोग की प्रक्रिया तथा संबंधित अधिकारियों के आंकड़ों को भी इस विवाद के संदर्भ में देखना जरूरी है।
महाराष्ट्र और दिल्ली में बड़ी संख्या में नाम बाहर
महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार SIR के बाद जारी ड्राफ्ट रोल में 2.06 करोड़ से ज्यादा मतदाता शामिल नहीं हैं। यह पिछले वोटर बेस का करीब 21.14 प्रतिशत बताया गया। वहीं ड्राफ्ट रोल में 7.71 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों के एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं हो सके। इसके अलावा कुछ लोग अपने पते पर नहीं मिले, कुछ की मृत्यु हो चुकी थी और कुछ मतदाता दूसरी जगह चले गए थे।
दिल्ली में भी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर विवाद सामने आया। करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं वाली सूची में 47 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए। अधिकारियों के मुताबिक इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी जो दूसरी जगह चले गए थे या सत्यापन के दौरान नहीं मिले। इसके अलावा मृत और एक से ज्यादा जगह पंजीकृत मतदाताओं के नाम भी हटाए गए।
बंगाल और कर्नाटक में भी उठे सवाल
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से SIR को लेकर चुनाव आयोग पर आरोप लगाती रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR का इस्तेमाल वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए किया गया। पश्चिम बंगाल में करीब 36.6 लाख मामलों का निपटारा अभी बाकी बताया गया है और ये मामले अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित हैं।
कर्नाटक में भी SIR को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर सत्यापन के लिए पर्याप्त समय और तय प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने बताया कि 1.08 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को ASDDO के तौर पर चिह्नित किया गया है, जबकि करीब 43 लाख मतदाताओं को लॉजिकल गड़बड़ियों को लेकर नोटिस भेजे जाने हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी व्यवस्था का बचाव करता रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि भारत की चुनाव प्रक्रिया को दूसरे देश भी समझ रहे हैं और उससे सीखने में रुचि दिखा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी SIR को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी थी।
इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता को लेकर है। विपक्ष जहां इसे राजनीतिक प्रक्रिया बता रहा है, वहीं चुनावी अधिकारी इसे मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करने की प्रक्रिया बता रहे हैं। आने वाले समय में दावे और आपत्तियों के निपटारे के बाद तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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