अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव

Report By: Kiran Prakash Singh

अमेरिका ने ईरान के IRGC ठिकानों पर हमले किए। होर्मुज को लेकर तनाव बढ़ा, ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का संकेत दिया।

2 सितंबर 2026 | digitallivenews.com

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अमेरिका-ईरान टकराव ने लिया गंभीर मोड़, होर्मुज से लेकर तेल बाजार तक बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार को अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई और मिसाइल हमले किए। बंदर अब्बास और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क़ेश्म द्वीप के आसपास धमाकों की खबरों के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया।

होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और दोनों देशों की जवाबी सैन्य कार्रवाई इस संघर्ष के सबसे अहम मुद्दे बन गए हैं।

बंदर अब्बास और क़ेश्म में धमाकों से मचा हड़कंप

ईरानी सरकारी टेलीविजन और AFP की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मोज़गन प्रांत के प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के पूर्वी हिस्सों और क़ेश्म द्वीप के पास कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती रिपोर्टों में ईरानी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि फिलहाल भारी जान-माल के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है।

अमेरिकी मध्य कमान यानी US CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि दोपहर 12 बजे Eastern Time पर IRGC से जुड़े ठिकानों के खिलाफ सटीक हमले शुरू किए गए। अमेरिका के अनुसार यह कार्रवाई होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर कथित ईरानी हमलों के जवाब में की गई।

ट्रंप की कड़ी चेतावनी, ‘सबसे बड़ा हमला अभी बाकी’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले को पूरी तरह जायज बताते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी। ट्रंप ने ईरान को “विफल देश” बताते हुए कहा कि अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई की तो उसे बेहद बड़े अमेरिकी हमले का सामना करना पड़ेगा।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल और Fox News से बातचीत में ईरान के प्रशासन पर अक्षमता और बिखराव का आरोप लगाया। उनका दावा था कि ईरान की नौसेना और वायुसेना कमजोर हो चुकी हैं तथा उसकी अर्थव्यवस्था और मुद्रा भी संकट में है।

होर्मुज में सीमित हमले की रणनीति

Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और उनके शीर्ष सलाहकारों ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ तथा US CENTCOM के साथ मिलकर सीमित सैन्य कार्रवाई की योजना पहले से तैयार की थी।

बताया गया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की उन रडार और मिसाइल क्षमताओं को निशाना बनाना था, जिनका इस्तेमाल अमेरिका के अनुसार अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन में बाधा डालने और जहाजों पर हमले के लिए किया जा रहा था।

इससे पहले रविवार, 30 अगस्त को अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य स्थित लराक द्वीप पर रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाने की बात कही थी। वाशिंगटन के अनुसार यह कार्रवाई ईरान को समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगे बिछाने से रोकने के लिए की गई थी।

ईरान का जवाब और सीजफायर का प्रस्ताव

लराक द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागने का दावा किया। जॉर्डन और UAE ने भी दावा किया कि उनकी रक्षा प्रणालियों ने कुछ ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही रोक दिया।

इसी बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने किर्गिस्तान में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान कहा कि यदि अमेरिका जून में तय युद्धविराम समझौते यानी MOU की शर्तों का ईमानदारी से पालन करता है, तो ईरान भी अपनी पुरानी प्रतिबद्धताओं पर लौटने को तैयार है।

होर्मुज से वैश्विक तेल और व्यापार पर खतरा

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरानी नेतृत्व पर्दे के पीछे समझौते या वार्ता की कोशिश करता है, लेकिन समय रहते कदम नहीं उठाता। वाशिंगटन का कहना है कि इसी वजह से सैन्य कार्रवाई की स्थिति बनी।

दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

अमेरिका और ईरान के बीच बंदर अब्बास तथा आसपास के द्वीपों को लेकर सीधा सैन्य टकराव ऐसे समय में बढ़ा है, जब पहले से ही क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौती बनी हुई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों देशों के बीच जवाबी सैन्य कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ता है या कूटनीतिक रास्ते से तनाव कम करने की कोशिश सफल होती है।

दिनांक: 2 सितंबर 2026
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