
Report By: Kiran Prakash Singh
मसूरी-देहरादून वैलीब्रिज की संरचना पर उठे सवाल, PWD ने दी सफाई, भारी वाहनों को लेकर चिंता, स्थानीय लोगों ने हादसे की आशंका जताई
मसूरी-देहरादून वैलीब्रिज पर उठे सवाल: क्या सुरक्षित है यह पुल या बन सकता है हादसे की वजह?
उत्तराखंड के मसूरी और देहरादून को जोड़ने वाले मार्ग पर बने नए वैलीब्रिज को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों, पूर्व जनप्रतिनिधियों और तकनीकी जानकारों ने इस पुल की संरचना पर चिंता जताई है। खासकर भारी वाहनों के दबाव को लेकर आशंका है कि कहीं यह पुल किसी बड़े हादसे का कारण न बन जाए।
शिव मंदिर के पास बना है अहम वैलीब्रिज
यह पुल मसूरी-देहरादून रोड पर शिव मंदिर के पास बनाया गया है, जो इस रूट का एक बेहद व्यस्त हिस्सा है। यह इलाका पर्यटन और स्थानीय यातायात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
हाल ही में इस मार्ग पर अस्थायी Bailey Bridge का निर्माण किया गया था ताकि टूटी हुई कनेक्टिविटी को जल्द बहाल किया जा सके।
संरचना को लेकर उठे तकनीकी सवाल
पुल की सबसे बड़ी चिंता इसका मध्य भाग है, जहां लोहे के गार्डरों से सपोर्ट दिया गया है।
- ये गार्डर ऊंचाई पर लगाए गए हैं
- नीचे कोई मजबूत फाउंडेशन नहीं दिखता
- गार्डर की मोटाई पुल के भार के अनुपात में कम प्रतीत होती है
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि यह संरचना भारी वाहनों के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती है।
स्थानीय लोगों की चेतावनी
स्थानीय लोगों और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने खुलकर चेतावनी दी है कि अगर एक साथ दो बसें या ट्रक पुल पर आ गए, तो बड़ा हादसा हो सकता है।
मसूरी जैसे पर्यटन स्थल पर रोजाना भारी संख्या में बसें, ट्रक और पर्यटक वाहन गुजरते हैं। पर्यटन सीजन में यह दबाव कई गुना बढ़ जाता है, जिससे खतरा और भी बढ़ जाता है।
PWD का जवाब और जिम्मेदारी का सवाल
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सफाई देते हुए कहा कि पुल के बीच लगाए गए लोहे के गार्डर शुरुआत से ही डिजाइन का हिस्सा थे, यह कोई बाद में जोड़ा गया बदलाव नहीं है।
साथ ही विभाग ने यह भी माना कि
👉 एक समय में केवल एक ही भारी वाहन पुल से गुजरना चाहिए
यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—अगर पुल एक साथ दो भारी वाहनों का भार नहीं झेल सकता, तो इसे आम ट्रैफिक के लिए खोला क्यों गया?
निगरानी और सुरक्षा पर बड़ा सवाल
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस नियम को लागू कैसे किया जाएगा।
- कोई ट्रैफिक सिग्नल नहीं
- कोई स्थायी बैरियर नहीं
- कोई तकनीकी मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं
ऐसे में सिर्फ निर्देश देने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पुल का तत्काल तकनीकी ऑडिट कराया जाए और जरूरत पड़ने पर भारी वाहनों पर रोक लगाई जाए।
निष्कर्ष
मसूरी-देहरादून वैलीब्रिज फिलहाल राहत का जरिया जरूर बना है, लेकिन इसकी संरचना को लेकर उठ रहे सवाल इसे संभावित खतरे में बदल सकते हैं।
जब खुद विभाग मान रहा है कि पुल की क्षमता सीमित है, तो जरूरी है कि जल्द से जल्द सुरक्षा उपाय, निगरानी और तकनीकी जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा टाला जा सके।