
Report By: Kiran Prakash Singh
ईरान संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच देश में महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है। दिग्गजों ने आर्थिक दबाव की चेतावनी दी है।
महंगाई का खतरा बढ़ा, पेट्रोल-डीजल पर बढ़ सकता दबाव
महंगाई को लेकर बढ़ी देश की चिंता
देश में महंगाई को लेकर चिंता लगातार गहराती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अब पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर दिखाई देगा।
ईरान संकट ने बढ़ाई टेंशन
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान संकट के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला हर बदलाव देश की अर्थव्यवस्था पर असर डालता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि कच्चा तेल लगातार महंगा होता रहा तो पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
उदय कोटक ने दी बड़ी चेतावनी
प्रसिद्ध उद्योगपति Uday Kotak ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले संभावित आर्थिक दबाव के लिए पहले से तैयार रहना चाहिए। सीआईआई बिजनेस समिट में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अभी तक ऊर्जा कीमतों का पूरा असर जनता पर नहीं पड़ा है, लेकिन आने वाले समय में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
पेट्रोल-डीजल पर बढ़ सकता है दबाव
उदय कोटक ने कहा कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भारी दबाव देखने को मिल सकता है। इसका असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि परिवहन खर्च बढ़ने से खाने-पीने और रोजमर्रा की कई वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं। इससे आम परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
आरबीआई ने भी दिए संकेत
Reserve Bank of India के गवर्नर Sanjay Malhotra ने भी संकेत दिए हैं कि अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबा खिंचता है तो सरकार के लिए ईंधन कीमतों का बोझ संभालना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों का असर आने वाले समय में उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
महंगाई के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48 प्रतिशत तक पहुंच गई है। लगातार छठे महीने महंगाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं खाद्य महंगाई दर भी बढ़कर 4.20 प्रतिशत हो गई है। इसका मतलब है कि खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के खर्चों तक आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है।
आम जनता पर पड़ेगा सीधा असर
यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर ट्रांसपोर्ट, सब्जियों, दूध, राशन और अन्य जरूरी वस्तुओं पर भी दिखाई देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ता है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आम लोगों को राहत देने की होगी।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ महीने देश की अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम हो सकते हैं। यदि वैश्विक हालात नहीं सुधरे तो महंगाई और ईंधन कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल देश की नजरें सरकार और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर टिकी हुई हैं।