ईरान पर फिर बरसेगा अमेरिका? ट्रंप के संकेत तेज

Report By: Kiran Prakash singh

चीन दौरे से लौटते ही डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सख्त रुख दिखाया। होर्मुज संकट के बीच अमेरिका फिर सैन्य कार्रवाई की तैयारी में है।

ईरान पर फिर अटैक करेगा अमेरिका? ट्रंप के संकेतों से बढ़ा तनाव

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया बयान और अमेरिकी सैन्य तैयारियों की खबरों ने यह आशंका बढ़ा दी है कि अमेरिका जल्द ही ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई कर सकता है। चीन दौरे से लौटने के बाद ट्रंप ने जिस तरह ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज किया, उससे वॉशिंगटन और तेहरान के बीच टकराव की संभावना और गहरी हो गई है।

ट्रंप की वापसी के साथ बढ़ी हलचल

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकारों ने ईरान को लेकर नई रणनीति तैयार कर ली है। बताया जा रहा है कि अगर कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह विफल होते हैं, तो अमेरिका दोबारा सैन्य ऑपरेशन शुरू कर सकता है। पेंटागन की ओर से “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को नए स्वरूप में फिर सक्रिय करने की तैयारी चल रही है।

पिछले महीने युद्धविराम की घोषणा के बाद इस अभियान को रोक दिया गया था, लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

शांति प्रस्ताव पर ट्रंप का सख्त रुख

बीजिंग से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान के हालिया शांति प्रस्ताव को सीधे तौर पर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रस्ताव की पहली लाइन ही उन्हें पसंद नहीं आती, तो वह उसे तुरंत अस्वीकार कर देते हैं।

ट्रंप का यह बयान साफ संकेत देता है कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर दबाव बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल राजनीतिक संदेश नहीं बल्कि संभावित सैन्य रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

शी जिनपिंग से मुलाकात में उठा ईरान मुद्दा

ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ हुई बैठक में ईरान का मुद्दा प्रमुख रूप से उठा था। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उन्होंने चीन से ईरान पर दबाव बनाने का कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया।

चीन और ईरान के बीच मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में बीजिंग की भूमिका इस पूरे संकट में बेहद अहम मानी जा रही है। खासकर ऊर्जा आपूर्ति और तेल व्यापार के कारण चीन किसी बड़े सैन्य संघर्ष से बचना चाहता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा केंद्र

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद का केंद्र बन चुका है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

अगर यहां तनाव बढ़ता है या मार्ग बाधित होता है, तो इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कई देश ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन समेत कई देशों की कोशिश है कि ऐसा समाधान निकले जिसे ट्रंप अपनी “कूटनीतिक जीत” के रूप में पेश कर सकें और साथ ही अमेरिका किसी लंबे युद्ध में न फंसे।

अमेरिका की दोहरी रणनीति

अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कांग्रेस में बयान देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका के पास संघर्ष बढ़ाने की पूरी योजना तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व में मौजूद अपने 50 हजार से ज्यादा सैनिकों की तैनाती धीरे-धीरे कम करने की योजना भी बना रहा है।

सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी और इजरायली अधिकारी अगले सप्ताह ईरान पर संभावित नए हमलों की तैयारी को लेकर बैठकें कर रहे हैं। मध्य पूर्व के अधिकारियों ने इसे युद्धविराम के बाद की “सबसे बड़ी सैन्य तैयारी” बताया है।

ऐसे में सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खुली जंग में बदल जाएगा, या फिर आखिरी समय में कूटनीति कोई रास्ता निकाल लेगी।

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