फिरोजाबाद अस्पताल में एक्सपायरी इंजेक्शन पर हंगामा

Report By: Kiran Prakash SIingh

फिरोजाबाद के एस.एम. अग्रवाल अस्पताल में बच्ची को एक्सपायरी इंजेक्शन लगाने का आरोप लगा। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया।

फिरोजाबाद के निजी अस्पताल में हंगामा, बच्ची को एक्सपायरी इंजेक्शन लगाने का आरोप

फिरोजाबाद | 09 मई 2026 | digitallivenews.com

फिरोजाबाद के चर्चित एस.एम. अग्रवाल अस्पताल में इलाज के दौरान एक बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बाद जमकर हंगामा हो गया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर एक्सपायरी इंजेक्शन लगाने और इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

परिजनों का आरोप है कि बच्ची को इंजेक्शन लगाए जाने के कुछ ही देर बाद उसकी हालत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद परिवार के लोगों ने अस्पताल में विरोध प्रदर्शन करते हुए कार्रवाई की मांग उठाई। मामले को लेकर इलाके में चर्चा तेज हो गई है।

इंजेक्शन लगते ही बिगड़ी बच्ची की हालत

परिजनों के मुताबिक बच्ची को इलाज के लिए एस.एम. अग्रवाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान डॉक्टरों द्वारा उसे इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।

परिवार का कहना है कि बच्ची को बेचैनी, कमजोरी और अन्य दिक्कतें शुरू हो गईं। अचानक हालत बिगड़ने से अस्पताल में मौजूद लोगों के बीच हड़कंप मच गया। इसके बाद परिजन भड़क उठे और डॉक्टरों से जवाब मांगने लगे।

एक्सपायरी इंजेक्शन लगाने का आरोप

परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्ची को जो इंजेक्शन लगाया गया था, वह एक्सपायरी डेट का था। इसी वजह से उसकी हालत खराब हुई। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने दवा और इंजेक्शन की जांच में लापरवाही बरती।

हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन सवालों के घेरे में आ गया है।

अस्पताल में हुआ जमकर हंगामा

बच्ची की हालत बिगड़ने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल पहुंच गए। गुस्साए लोगों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया और डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगाए।

कुछ देर के लिए अस्पताल का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। स्थिति को संभालने के लिए अस्पताल कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

स्वास्थ्य विभाग पर भी उठे सवाल

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निजी अस्पतालों की नियमित जांच और दवाओं की निगरानी में लापरवाही बरती जा रही है।

लोगों ने आरोप लगाया कि विभाग “कुंभकरणीय नींद” में सोया हुआ है और अस्पतालों में हो रही लापरवाही पर समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती। इस मामले ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

जांच और कार्रवाई की मांग तेज

परिजनों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सही इलाज नहीं मिला होता तो बच्ची की जान भी जा सकती थी।

फिलहाल बच्ची की हालत पर डॉक्टरों की निगरानी जारी है। वहीं घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो अस्पताल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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