पुणे लॉ कॉलेज रैगिंग केस: जूनियर छात्र के आरोपों से मचा हड़कंप

Report By: Kiran Prakash Singh

पुणे के प्रतिष्ठित लॉ कॉलेज में जूनियर छात्र से रैगिंग के आरोप के बाद 5 छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पीड़ित ने मानसिक उत्पीड़न और गाली-गलौज के आरोप लगाए हैं। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

पुणे लॉ कॉलेज में रैगिंग का मामला, 5 छात्रों पर FIR

27 अप्रैल 2026 | Digitallivenews.com

1. प्रतिष्ठित कॉलेज में रैगिंग का गंभीर आरोप

महाराष्ट्र के पुणे स्थित एक नामी लॉ कॉलेज में रैगिंग का मामला सामने आने के बाद शैक्षणिक माहौल में हड़कंप मच गया

डेक्कन पुलिस स्टेशन में 25 अप्रैल को पांच छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। यह मामला महाराष्ट्र रैगिंग निषेध अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।


2. शिकायत के बाद खुला मामला

शिकायतकर्ता छात्र ने बताया कि उसने पहले कॉलेज प्रशासन से संपर्क किया था, लेकिन उसे संतोषजनक कार्रवाई नहीं मिली।

इसके बाद उसने मामला UGC के एंटी-रैगिंग सिस्टम तक पहुंचाया, जिसके बाद पुलिस ने संज्ञान लेकर FIR दर्ज की।

यह भी सामने आया है कि यह मामला एक साल से ज्यादा समय से लंबित था, जो अब जाकर पुलिस तक पहुंचा।


3. क्या हैं रैगिंग के आरोप?

पीड़ित छात्र ने आरोप लगाया कि उसी हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने उसके साथ

  • गाली-गलौज और अपमानजनक व्यवहार किया
  • मानसिक रूप से प्रताड़ित किया
  • कमरे में बंद करना, दरवाजे पर अंडे फेंकना और बाहर गुटखा थूकना जैसी हरकतें कीं

इसके अलावा, रात में तेज़ म्यूजिक बजाकर परेशान करना और आवागमन तक सीमित करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।


4. छोटी बात से शुरू हुआ विवाद

FIR के अनुसार, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब शिकायतकर्ता ने परिसर में धूम्रपान का विरोध किया

इसके बाद आरोपी छात्रों ने उसे निशाना बनाकर लगातार मानसिक उत्पीड़न किया।

यह पहलू इस मामले को और गंभीर बनाता है, क्योंकि यह दिखाता है कि छोटी बात भी रैगिंग में बदल सकती है


5. पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की जांच जारी है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस ने कहा कि घटनाओं की पूरी श्रृंखला की जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि कड़े कानून होने के बावजूद रैगिंग क्यों नहीं रुक रही


निष्कर्ष

पुणे का यह मामला सिर्फ एक कॉलेज तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चेतावनी है।

रैगिंग जैसे अपराध छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालते हैं। जरूरत है कि कॉलेज प्रशासन और कानून व्यवस्था मिलकर ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई और जागरूकता बढ़ाएं।


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