
Report By: Kiran Prakash Singh
छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए बयान को लेकर विवादों में घिरे धीरेंद्र शास्त्री ने माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और उनका इरादा सिर्फ सम्मान बढ़ाने का था।
‘मेरी कुंडली में ही विवाद लिखा है’: शिवाजी बयान पर धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी
27 अप्रैल 2026 | Digitallivenews.com
1. विवादित बयान के बाद माफी
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने शिवाजी महाराज से जुड़े बयान को लेकर विवादों में घिर गए। बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी भी तरह से छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करना नहीं था, बल्कि उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया गया।
2. क्या था पूरा विवाद?
नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्ध करते-करते थक गए थे और उन्होंने अपना मुकुट समर्थ रामदास स्वामी को सौंपने की इच्छा जताई थी।
इस बयान के बाद महाराष्ट्र में जबरदस्त विरोध शुरू हो गया और कई राजनीतिक दलों व संगठनों ने इसे इतिहास के साथ छेड़छाड़ बताया।
3. ‘बयान को गलत तरीके से पेश किया गया’
माफी मांगते हुए शास्त्री ने कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया। उनका कहना है कि उन्होंने शिवाजी महाराज के सम्मान और भक्ति को दर्शाने के लिए यह बात कही थी।
उन्होंने कहा कि जो लोग उनका पूरा बयान सुनेंगे, वे समझेंगे कि उन्होंने कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की।
4. ‘मेरी कुंडली में विवाद लिखा है’—शास्त्री
नागपुर में मीडिया से बात करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने हल्के अंदाज में कहा कि “मेरी कुंडली में ही विवाद लिखा है”।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ ताकतें उनके खिलाफ साजिश कर रही हैं और उनके बयानों को जानबूझकर गलत तरीके से फैलाया जा रहा है।
5. सियासत और समाज में बढ़ा बवाल
इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। कई नेताओं और संगठनों ने शास्त्री की टिप्पणी की आलोचना की और इसे इतिहास का अपमान बताया।
हालांकि, माफी के बाद भी यह मुद्दा पूरी तरह शांत नहीं हुआ है और बहस जारी है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर बयान देते समय कितनी सावधानी जरूरी है।
निष्कर्ष
धीरेंद्र शास्त्री का यह मामला दिखाता है कि सार्वजनिक मंच से दिए गए बयान कितनी तेजी से राष्ट्रीय विवाद बन सकते हैं।
यह घटना एक बड़ी सीख भी देती है—इतिहास और महापुरुषों पर बोलते समय शब्दों की जिम्मेदारी बेहद जरूरी होती है।