
Report By: Kiran Prakash Singh
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में बिधाननगर सीट से टीएमसी उम्मीदवार सुजीत बोस ने ममता बनर्जी की चौथी बार जीत का दावा किया है। उन्होंने बीजेपी पर भ्रम फैलाने और चुनावी राजनीति करने का आरोप लगाया।
बंगाल चुनाव 2026: ‘फिर आएगी ममता सरकार’, बिधाननगर से सुजीत बोस का दावा
27 अप्रैल 2026 | Digitallivenews.com
1. चुनावी माहौल में तेज हुआ सियासी पारा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। कोलकाता और आसपास के इलाकों में सभी प्रमुख पार्टियां जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुटी हैं।
बिधाननगर सीट, जो इस चुनाव की हाई-प्रोफाइल सीटों में गिनी जा रही है, यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। Sujit Bose इस सीट से लगातार सक्रिय हैं और जनता के बीच पहुंच बनाने में लगे हुए हैं।
2. ‘चौथी बार बनेगी सरकार’—टीएमसी का दावा
टीएमसी उम्मीदवार सुजीत बोस ने दावा किया है कि Mamata Banerjee के नेतृत्व में पार्टी चौथी बार सत्ता में वापसी करेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य में टीएमसी सरकार ने विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में काम किया है, जिसका सीधा फायदा चुनाव में दिखाई देगा। उनके मुताबिक, पहले चरण में हुई भारी वोटिंग टीएमसी के पक्ष में संकेत दे रही है।
3. बीजेपी पर बोला हमला
चुनावी प्रचार के दौरान सुजीत बोस ने बीजेपी पर कड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए हर संभव तरीका अपना रही है, लेकिन जनता अब सब समझ चुकी है।
उन्होंने बीजेपी के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि 4 मई के बाद राज्य में सत्ता बदल जाएगी। बोस ने इसे “भ्रम फैलाने की राजनीति” करार दिया।
4. बिधाननगर सीट क्यों है खास?
बिधाननगर सीट लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ मानी जाती है। सुजीत बोस यहां से लगातार चार बार विधायक रह चुके हैं और इस बार पांचवीं जीत की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, इस बार मुकाबला आसान नहीं है क्योंकि बीजेपी और अन्य विपक्षी दल भी इस सीट पर मजबूती से चुनौती दे रहे हैं।
5. चुनावी मुद्दे और जनता का मूड
2026 के बंगाल चुनाव में विकास, भ्रष्टाचार, पहचान की राजनीति और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
जहां टीएमसी अपने काम और योजनाओं को जनता के सामने रख रही है, वहीं विपक्ष सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं के आरोप लगा रहा है।
निष्कर्ष
बिधाननगर समेत पूरे पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो चुका है।
एक तरफ टीएमसी को अपने काम और नेतृत्व पर भरोसा है, तो दूसरी तरफ बीजेपी बदलाव के नारे के साथ मैदान में है। अब देखना होगा कि जनता किसे अपना समर्थन देती है—लगातार सत्ता में रही टीएमसी या बदलाव की उम्मीद लेकर आई विपक्षी ताकतें।