
Report By: Kiran Prakash Singh
दिल्ली शराब नीति मामले में Arvind Kejriwal द्वारा हाईकोर्ट जज स्वर्णकांता शर्मा को लिखी चिट्ठी के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बीजेपी नेता Shahnawaz Hussain ने इसे न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश बताते हुए तीखा हमला बोला। मामले ने दिल्ली से लेकर बंगाल चुनाव तक सियासी बहस तेज कर दी है।
केजरीवाल की चिट्ठी से गरमाई सियासत: कोर्ट से सड़क तक बढ़ा विवाद |
27 अप्रैल 2026 | Digitallivenews.com
1. क्या है पूरा मामला?
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने हाईकोर्ट की जज स्वर्णकांता शर्मा को चिट्ठी लिखकर बड़ा कदम उठाया। इस चिट्ठी में उन्होंने कहा कि उन्हें इस केस में “न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई” और इसलिए वे अब कोर्ट में पेश नहीं होंगे।
यह मामला कथित दिल्ली शराब नीति केस से जुड़ा है, जो पहले से ही देश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
2. केजरीवाल का ‘सत्याग्रह’ वाला रुख
केजरीवाल ने अपने फैसले को महात्मा गांधी के सत्याग्रह से जोड़ते हुए कहा कि वह अब इस रास्ते पर चलेंगे। उनका कहना है कि यह कदम आत्मसम्मान और न्याय की भावना से लिया गया है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि अदालत के फैसले के खिलाफ वे आगे सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
3. बीजेपी का तीखा पलटवार
इस चिट्ठी के बाद सियासत पूरी तरह गरमा गई है। बीजेपी नेता Shahnawaz Hussain ने केजरीवाल पर हमला बोलते हुए कहा कि यह न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा—“चोर की दाढ़ी में तिनका”, यानी केजरीवाल खुद ही अपनी स्थिति जाहिर कर रहे हैं।
बीजेपी का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक सहानुभूति लेने की रणनीति है।
4. कोर्ट का रुख और कानूनी स्थिति
दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही इस केस में जज बदलने की मांग खारिज कर चुका है। कोर्ट ने कहा कि जज की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का कोई ठोस आधार नहीं है।
ऐसे में केजरीवाल का कोर्ट में पेश न होना एक असामान्य और विवादित कदम माना जा रहा है, जिसका असर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
5. राजनीति क्यों हुई गर्म?
यह मामला अब सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।
- AAP इसे अन्याय के खिलाफ लड़ाई बता रही है
- बीजेपी इसे ड्रामा और दबाव की राजनीति कह रही है
यही वजह है कि यह विवाद अब कोर्ट से निकलकर जनता और चुनावी माहौल तक पहुंच गया है।
निष्कर्ष
केजरीवाल की यह चिट्ठी कई सवाल खड़े करती है—क्या यह सिस्टम के खिलाफ आवाज़ है या कानूनी प्रक्रिया से बचने का तरीका?
आने वाले दिनों में अदालत का रुख और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तय करेंगी कि यह मामला किस दिशा में जाता है। फिलहाल, इतना तय है कि यह मुद्दा दिल्ली से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक हलचल मचा चुका है।