पुणे में ड्रेनेज टैंक बना मौत का जाल, 3 मजदूरों की दर्दनाक मौत

Report By: Kiran Prakash Singh

महाराष्ट्र के पुणे में ड्रेनेज टैंक की सफाई के दौरान बड़ा हादसा हो गया, जहां एक मजदूर को बचाने उतरे दो अन्य मजदूरों की भी जहरीली गैस से दम घुटने से मौत हो गई। यह घटना पुरंदर तालुका के बेलसर गांव में हुई, जहां तीनों मजदूर टैंक में उतरने के बाद बाहर नहीं आ सके।

पुणे में ड्रेनेज टैंक बना मौत का जाल: एक को बचाने उतरे 2 मजदूर भी नहीं लौटे | Digitallivenews.com

27 अप्रैल 2026 | Digitallivenews.com

1. दर्दनाक हादसा: तीन मजदूरों की मौत

महाराष्ट्र के पुणे जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। पुरंदर तालुका के बेलसर गांव स्थित एक मशरूम कंपनी में ड्रेनेज टैंक की सफाई के दौरान तीन मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई।

यह हादसा रविवार शाम करीब 4:30 बजे हुआ, जब एक मजदूर टैंक में सफाई के लिए उतरा लेकिन वापस नहीं आया।


2. एक को बचाने गए, तीनों की गई जान

घटना ने उस समय और भयावह रूप ले लिया जब पहले मजदूर के बाहर न आने पर दूसरा मजदूर उसे देखने के लिए अंदर गया। इसके बाद तीसरा मजदूर भी बचाने के लिए टैंक में उतरा, लेकिन तीनों ही बाहर नहीं निकल सके।

यह घटना दिखाती है कि कैसे बिना सुरक्षा के ऐसे टैंकों में उतरना जानलेवा साबित हो सकता है।


3. जहरीली गैस बनी मौत की वजह

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि टैंक के अंदर जहरीली गैस जमा हो गई थी, जिसके कारण मजदूरों का दम घुट गया।

पुलिस के मुताबिक, टैंक जैसे बंद स्थानों में गैस बनने और ऑक्सीजन की कमी के कारण मजदूर बेहोश होकर वहीं गिर गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।


4. स्लैब तोड़कर निकाले गए शव

जब काफी देर तक तीनों मजदूर बाहर नहीं आए तो आसपास के लोगों को शक हुआ। इसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए अर्थमूवर मशीन से टैंक का स्लैब तोड़ा गया और मजदूरों को बाहर निकाला गया।

उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।


5. यूपी के रहने वाले थे तीनों मजदूर

मृतकों की पहचान पिंटू राजेश प्रसाद (23), व्यास सोहम कुमार (22) और गौतम रामसुरन कुशवाहा (36) के रूप में हुई है।

तीनों मजदूर उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले थे और रोज़गार के लिए पुणे आए थे। पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मृत्यु का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।


निष्कर्ष

यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि आखिर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर नियमों का पालन क्यों नहीं होता।

ड्रेनेज और टैंक जैसे खतरनाक कामों में बिना सुरक्षा उपकरणों के उतरना सीधे-सीधे मौत को न्योता देना है। जरूरत है कि ऐसे मामलों में सख्त नियम लागू हों ताकि भविष्य में किसी और परिवार को यह दर्द न झेलना पड़े।

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