कांग्रेस से BJP तक, जानिए हिमंत सरमा का पूरा सफर

Report By: Kiran Prakash Singh

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दूसरी बार ली शपथ। जानिए छात्र राजनीति से लेकर BJP के बड़े रणनीतिकार बनने तक का सफर।

📅 Date: 12 May 2026
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छात्र राजनीति से असम के मुख्यमंत्री तक, ऐसा रहा हिमंत बिस्वा सरमा का सफर

लगातार दूसरी बार बने असम के मुख्यमंत्री

असम की राजनीति में बड़ा इतिहास रचते हुए Himanta Biswa Sarma ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही वे राज्य में लगातार दो कार्यकाल तक मुख्यमंत्री बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए हैं। गुवाहाटी में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल Lakshman Prasad Acharya ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।


शपथ समारोह में दिखी NDA की ताकत

इस शपथ ग्रहण समारोह को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना गया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh, वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी समारोह में शामिल हुए।


2015 में छोड़ी कांग्रेस, बदली राजनीति

हिमंत बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प माना जाता है। साल 2015 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। उस समय असम में कांग्रेस बेहद मजबूत थी और भाजपा के पास केवल 5 विधायक थे। लेकिन हिमंत सरमा ने रणनीतिक तरीके से संगठन को मजबूत किया और भाजपा को पूर्वोत्तर में नई पहचान दिलाई।


भाजपा को पूर्वोत्तर में दिलाई बड़ी ताकत

भाजपा ने 2016 में हिमंत बिस्वा सरमा को नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) का संयोजक बनाया। इसके बाद उन्होंने पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रीय दलों को भाजपा के साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि पूर्वोत्तर में भाजपा के तेजी से बढ़ते प्रभाव के पीछे हिमंत सरमा की रणनीति सबसे बड़ी वजह रही है।


छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर

हिमंत बिस्वा सरमा की शुरुआती पढ़ाई गुवाहाटी में हुई। उन्होंने कॉटन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में बीए और एमए किया। बाद में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और कुछ समय तक गुवाहाटी हाईकोर्ट में वकालत भी की। साल 2006 में उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की।


AASU से कांग्रेस तक का सफर

उनका राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। 1991-92 में वे कॉटन कॉलेज छात्र संघ के महासचिव रहे और बाद में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) से जुड़े। 1990 के दशक में उन्होंने कांग्रेस में प्रवेश किया और 2001 में जालुकबारी सीट से पहली बार विधायक बने। खास बात यह है कि वे इस सीट से लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं।


5 से 100 विधायकों तक पहुंची BJP

जब हिमंत सरमा भाजपा में शामिल हुए थे, तब पार्टी असम में बेहद कमजोर स्थिति में थी। लेकिन पिछले एक दशक में भाजपा ने राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए बड़ा जनाधार तैयार किया। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक हिमंत बिस्वा सरमा की रणनीति, संगठन क्षमता और क्षेत्रीय राजनीति की समझ ने भाजपा को पूर्वोत्तर में नई ऊंचाई तक पहुंचाया।


हिमंत बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर संघर्ष, रणनीति और लगातार मेहनत का उदाहरण माना जाता है। छात्र राजनीति से शुरुआत कर उन्होंने खुद को पूर्वोत्तर की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल किया। आज वे भाजपा के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने पार्टी को नए क्षेत्रों में मजबूत आधार दिलाया।


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