ट्राई पर कांग्रेस का हमला: बीजेपी का IT सेल बन गया

Report By: Kiran Prakash Singh

कांग्रेस का ट्राई पर बड़ा आरोप: “बीजेपी का IT सेल बन गया है नियामक”

मुंबई (DigitalLiveNews)। महाराष्ट्र में चुनाव से पहले कांग्रेस और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के बीच जोरदार टकराव देखने को मिल रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ट्राई ने जानबूझकर उसके कार्यकर्ताओं को एसएमएस भेजने के आवेदन को अस्वीकार कर दिया, जिससे पार्टी की प्रचार रणनीति प्रभावित हो रही है। वहीं, ट्राई ने कांग्रेस के इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए सफाई दी है कि उसे ऐसा कोई आवेदन मिला ही नहीं।

इस विवाद की शुरुआत कांग्रेस के डेटा एनालिटिक्स विभाग के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती की एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि ट्राई, गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग के बीच “सूचना दबाने की एक संगठित साजिश” चल रही है।

कांग्रेस का आरोप: जानबूझकर रोका गया संचार

चक्रवर्ती ने कहा कि कांग्रेस ने तय प्रक्रिया के तहत ट्राई को एसएमएस भेजने के लिए आवेदन किया था, ताकि उसके कार्यकर्ता और मतदाता जुड़ाव अभियान को आगे बढ़ा सकें। लेकिन, इस आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया। उन्होंने एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया जिसमें अधिकारियों द्वारा आवेदन अस्वीकार किए जाने की जानकारी दी गई थी।

उन्होंने आरोप लगाया, “ट्राई का यह इनकार गृह मंत्रालय, चुनाव आयोग और दूरसंचार नियामक के बीच पूर्ण समन्वय को दर्शाता है। क्या यह संकेत पर्याप्त नहीं है कि सरकार के विभिन्न अंग सूचना दबाने और छिपाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं?”

ट्राई की सफाई: हमने कोई आवेदन नहीं खारिज किया

कांग्रेस के इन आरोपों पर ट्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर बयान जारी कर सफाई दी। ट्राई ने कहा, “हमें कांग्रेस की ओर से कोई आवेदन नहीं मिला है। ऐसा प्रतीत होता है कि आवेदन किसी एक सेवा प्रदाता को भेजा गया था, जिसने उसे अस्वीकार कर दिया। ट्राई व्यक्तिगत संदेश टेम्प्लेट की स्वीकृति से संबंधित नहीं है।”

ट्राई के इस जवाब के बाद भी कांग्रेस नेताओं का आक्रोश थमा नहीं।

मणिकम टैगोर का हमला: ट्राई बना बीजेपी का IT सेल

कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने ट्राई की सफाई को हास्यास्पद बताते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “ट्राई अब बीजेपी का आईटी सेल बन गया है। क्या यह लोकतंत्र में सेंसरशिप की शुरुआत है?”

उन्होंने पूछा, “इस सेंसरशिप श्रृंखला को कौन नियंत्रित कर रहा है? क्या अमित शाह, अश्विनी वैष्णव या दूरसंचार विभाग के अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार इसके पीछे हैं? गृह मंत्रालय निगरानी कर रहा है, दूरसंचार मंत्रालय संचार को रोक रहा है और चुनाव आयोग मूकदर्शक बन गया है।”

“महाराष्ट्र घोटाले को छिपाने की कोशिश”

मणिकम टैगोर ने आगे आरोप लगाया कि यह पूरा मामला महाराष्ट्र में चुनावी घोटाले को छिपाने की एक समन्वित कोशिश है। उन्होंने कहा, “अगर वोट चोरी नहीं हुई है, तो अमित शाह एक यूट्यूब लिंक से इतना क्यों डरते हैं?” टैगोर के अनुसार, यह पूरा विवाद इस बात का प्रमाण है कि सत्ता पक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रहा है।

चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा

यह मामला सिर्फ एक तकनीकी प्रक्रिया या प्रशासनिक गलती का नहीं, बल्कि चुनाव से पहले सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते अविश्वास का प्रतीक बन गया है। कांग्रेस जहां इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और चुनावी पारदर्शिता पर हमला बता रही है, वहीं ट्राई जैसे संवैधानिक निकाय की छवि भी इस विवाद में प्रभावित हो रही है।

निष्कर्ष

ट्राई और कांग्रेस के बीच यह टकराव सिर्फ एक आवेदन को लेकर नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, सत्ता के दुरुपयोग के आरोप और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल शामिल हैं। जैसे-जैसे महाराष्ट्र चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ऐसे मुद्दे और ज्यादा राजनीतिक गर्मी ला सकते हैं।

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