सोनिया ने मनमोहन सिंह को सराहा, मोदी सरकार पर साधा निशाना

Report By: Kiran Prakash Singh

सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह को कोयला मामले में क्लीन चिट मिलने पर सराहा। उन्होंने उनकी ईमानदारी की तारीफ करते हुए मोदी सरकार पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह की तारीफ कर मोदी सरकार पर साधा निशाना

डिजिटल लाइव न्यूज़ | 11 अगस्त 2026 | digitallivenews.com

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली क्लीन चिट का स्वागत किया है। उन्होंने मनमोहन सिंह की ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में उनके रिकॉर्ड की जमकर तारीफ की। साथ ही सोनिया गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए राजनीतिक निशाना साधा।

सोनिया गांधी ने कहा कि मनमोहन सिंह का सार्वजनिक जीवन पारदर्शिता, जवाबदेही और शुचिता का उदाहरण रहा है। उन्होंने दावा किया कि इतिहास उन्हें एक मृदु, सौम्य और महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री के तौर पर याद रखेगा।

कोयला मामले में क्लीन चिट का किया स्वागत

सोनिया गांधी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में लिखे अपने लेख में 29 जुलाई 2026 को भारतीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण दिन बताया। उन्होंने कहा कि इस दिन सुप्रीम कोर्ट ने कथित कोयला घोटाला मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के आधार पर मनमोहन सिंह को मिली क्लीन चिट को बरकरार रखा।

उनके मुताबिक, यह फैसला मनमोहन सिंह के खिलाफ लंबे समय से चल रहे राजनीतिक अभियान के अंत का संकेत है। सोनिया ने कहा कि मनमोहन सिंह असाधारण ईमानदारी और शुचिता वाले व्यक्ति थे और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों ने उनके सार्वजनिक जीवन को प्रभावित किया।

मनमोहन सिंह के खिलाफ अभियान का लगाया आरोप

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह के खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चलाया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान में नौकरशाही, मीडिया, न्यायपालिका और विभिन्न नागरिक संगठनों के साथ-साथ आरएसएस और बीजेपी से जुड़े लोगों की भूमिका थी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि मनमोहन सिंह ने हमेशा अपने पद की गरिमा बनाए रखी और उनके कार्यकाल में जवाबदेही और संस्थागत प्रक्रियाओं को महत्व दिया गया।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मनमोहन सिंह की छवि के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि लंबे समय तक चले आरोपों के बावजूद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई ठोस आधार सामने नहीं आया।

मोदी के पुराने बयान पर भी निशाना

सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2017 के राज्यसभा भाषण का भी जिक्र किया। उन्होंने मनमोहन सिंह पर की गई प्रधानमंत्री की उस टिप्पणी को याद करते हुए उसे संसदीय इतिहास के निचले स्तरों में से एक बताया।

सोनिया ने आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह को सार्वजनिक रूप से बदनाम करने की कोशिश की गई। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के हालिया राजनीतिक बयानों का संदर्भ देते हुए भी उन पर तंज कसा।

कांग्रेस नेता का कहना है कि मनमोहन सिंह के प्रति सार्वजनिक जीवन में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह उनके व्यक्तित्व और लंबे राजनीतिक योगदान के अनुरूप नहीं थी।

ED और CBI के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का उपयोग विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।

कांग्रेस लंबे समय से केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाती रही है। वहीं सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और एजेंसियों की कार्रवाई को कानून के तहत होने वाली जांच बताती है।

सोनिया के ताजा बयान के बाद एक बार फिर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है।

मनमोहन सरकार की आर्थिक नीतियों का किया बचाव

सोनिया गांधी ने अपने लेख में मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल की आर्थिक नीतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व में भारत ने कई बड़े आर्थिक बदलाव देखे और निजी निवेश तथा घरेलू खपत को बढ़ावा मिला।

उन्होंने वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का भी जिक्र किया और दावा किया कि उस समय देश ने अपनी आर्थिक मजबूती दिखाई।

सोनिया गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद में भी केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बाद कांग्रेस इसे उनके सार्वजनिक जीवन की ईमानदारी की पुष्टि के तौर पर देख रही है।

वहीं सोनिया गांधी द्वारा मोदी सरकार पर लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि बीजेपी इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद तथा राजनीतिक मंचों पर कितना जोर पकड़ता है।

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