
Report By: Kiran Prakash Singh
भारत में क्रिप्टो एक्सचेंजों पर होगा सख्त नियामक ढांचा, सेबी और आरबीआई कर सकते हैं जिम्मेदारी संभाल
भारत सरकार क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए पुख्ता नियम तैयार कर रही है। सेबी और आरबीआई निवेशक सुरक्षा, ट्रेडिंग और विदेशी लेनदेन पर नजर रखेंगे।
नई दिल्ली (Digital Live News): भारत में क्रिप्टो कारोबार पर निगरानी को लेकर लंबे समय से कई एजेंसियों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा होता रहा है। कर अधिकारी आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों के कराधान से जुड़े मामलों पर नजर रखते हैं, वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) धन शोधन रोधी नियमों के अनुपालन की निगरानी करती है, जबकि प्रवर्तन एजेंसियां अवैध पूंजी प्रवाह की जांच करती हैं।
हालांकि, अब सरकार ने क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए ठोस और पुख्ता नियम-कायदे तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। वित्त मंत्रालय ने इस मामले में सेबी और आरबीआई के साथ बातचीत शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित नियामक ढांचे के तहत मुख्य जिम्मेदारी सेबी को दी जा सकती है, जबकि आरबीआई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), सीमा पार लेनदेन और पूंजी प्रवाह पर नजर रखेगा।
इस नए ढांचे के तहत सभी भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों को सेबी के पास अपना पंजीकरण कराना होगा और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, खुलासे और निवेशक सुरक्षा मानदंडों का पालन करना अनिवार्य होगा। इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि भारत में क्रिप्टो कारोबार अब कानूनी और पारदर्शी रूप में संचालित हो।
सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में क्रिप्टो निगरानी और क्रियान्वयन से जुड़ी कई चुनौतियां हैं।
“क्रिप्टो लेनदेन का गुमनाम और सीमाहीन स्वरूप, विशेषकर विदेशी एक्सचेंज, निजी वॉलेट और विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया गया लेनदेन, अधिकारियों के लिए निगरानी मुश्किल बना देता है,” एक अधिकारी ने बताया।
उन्होंने आगे कहा कि क्रिप्टो पर कर लागू होने के बावजूद एक विशेष बाजार नियामक की अनुपस्थिति के कारण लेनदेन की ट्रैकिंग और सही कर देयता का आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियामक ढांचे के लागू होने के बाद न केवल निवेशक सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि क्रिप्टो बाजार में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। यह कदम भारत में क्रिप्टो कारोबार को सुरक्षित और कानूनी मान्यता देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
इस तरह, वित्त मंत्रालय का यह प्रयास यह दिखाता है कि भारत क्रिप्टो कारोबार को नियंत्रित करते हुए निवेशकों और अर्थव्यवस्था की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।