
Report By: Kiran Prakash Singh
रामपुर मनिहारन में 2022 से 2024 के बीच BJP की बढ़त घटी और सपा-कांग्रेस का वोट बढ़ा। 2027 में SC, मुस्लिम और OBC वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
रामपुर मनिहारन में बदले चुनावी समीकरण, 2027 में BJP के सामने चुनौती
डिजिटल लाइव न्यूज़ | 12 अगस्त 2026 | digitallivenews.com
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो रही हैं। सहारनपुर जिले की रामपुर मनिहारन विधानसभा सीट पर भी पिछले दो चुनावों के आंकड़ों ने राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत दिए हैं। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर 2022 में बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन और सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच अंतर काफी कम हो गया।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या 2027 में रामपुर मनिहारन सीट पर मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा हो सकता है?
2022 में बीजेपी ने दर्ज की थी बड़ी जीत
रामपुर मनिहारन विधानसभा सीट संख्या 6 है और यह SC वर्ग के लिए आरक्षित है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के देवेन्द्र कुमार निम ने जीत दर्ज की थी।
चुनावी आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी को 89,109 वोट मिले थे। वहीं आरएलडी-सपा गठबंधन के उम्मीदवार को 64,864 वोट और बसपा उम्मीदवार को 68,516 वोट मिले। आजाद समाज पार्टी को 4,606, जबकि कांग्रेस को 1,544 वोट मिले।
इस तरह बीजेपी ने करीब 24,245 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। खास बात यह रही कि बसपा दूसरे स्थान पर रही और आरएलडी-सपा गठबंधन तीसरे स्थान पर रहा।
2024 में घट गई बीजेपी की बढ़त
2024 के लोकसभा चुनाव में रामपुर मनिहारन विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों ने तस्वीर बदलती हुई दिखाई। बीजेपी-आरएलडी गठबंधन को 85,950 वोट मिले, जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन को 84,393 वोट मिले।
दोनों गठबंधनों के बीच अंतर केवल 1,557 वोट का रहा। 2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी की करीब 24 हजार वोटों की बढ़त की तुलना में यह अंतर काफी कम था।
वहीं बसपा को 42,541 वोट मिले। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर 2022 की तुलना में बसपा का वोट काफी घटा, जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन का समर्थन बढ़ा।
SC और मुस्लिम वोट पर नजर
रामपुर मनिहारन सीट का चुनावी समीकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीट आरक्षित होने के बावजूद यहां मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 90 हजार और SC मतदाताओं की संख्या करीब 85 हजार बताई जाती है।
इसके अलावा गुर्जर, सैनी, जाट, पाल-कश्यप और अन्य समुदाय भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आरक्षित सीट होने के कारण सभी प्रमुख दलों को SC वर्ग से ही उम्मीदवार मैदान में उतारना होगा। ऐसे में उम्मीदवार की सामाजिक पकड़ के साथ-साथ अलग-अलग समुदायों के वोटों का गठजोड़ जीत-हार तय करने में अहम हो सकता है।
सपा-कांग्रेस को 2027 में क्या फायदा?
2024 के आंकड़ों ने विपक्षी गठबंधन के लिए उम्मीद जरूर बढ़ाई है। 2022 में आरएलडी-सपा गठबंधन के मुकाबले 2024 में सपा-कांग्रेस गठबंधन का वोट काफी बढ़ा।
अगर 2024 में बीजेपी गठबंधन और सपा-कांग्रेस के बीच बना करीबी मुकाबला 2027 में भी कायम रहता है तो रामपुर मनिहारन में चुनावी लड़ाई कांटे की टक्कर में बदल सकती है।
सपा की रणनीति में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को साथ लाने की कोशिश महत्वपूर्ण हो सकती है। वहीं कांग्रेस के साथ गठबंधन होने की स्थिति में मुस्लिम और अन्य विपक्षी वोटों के एकजुट होने का असर भी सीट पर पड़ सकता है।
हालांकि, 2027 के चुनाव से पहले उम्मीदवारों, गठबंधन और स्थानीय मुद्दों में बदलाव संभव है। इसलिए मौजूदा आंकड़ों को केवल राजनीतिक संकेत के तौर पर देखना उचित होगा।
BJP के सामने वोट बचाने की चुनौती
बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती 2022 की बड़ी बढ़त को दोबारा हासिल करना होगी। पार्टी को SC, OBC और अति पिछड़े वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ अन्य समर्थक सामाजिक समूहों को भी एकजुट रखना होगा।
दूसरी तरफ विपक्ष के सामने भी चुनौती कम नहीं है। अगर सपा-कांग्रेस गठबंधन को 2024 जैसा प्रदर्शन दोहराना है तो उसे अलग-अलग सामाजिक समूहों के वोटों को एक साथ लाना होगा।
रामपुर मनिहारन में 2027 का मुकाबला कई स्तरों पर दिलचस्प हो सकता है। 2022 में जहां बीजेपी ने बड़ी बढ़त बनाई थी, वहीं 2024 में विपक्ष ने अंतर काफी कम कर दिया। अब 2027 में SC और मुस्लिम वोट, OBC-अति पिछड़ा समीकरण, उम्मीदवार की सामाजिक पकड़ और गठबंधन की रणनीति सबसे महत्वपूर्ण कारक हो सकते हैं।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि 2027 में कौन बाजी मारेगा, लेकिन उपलब्ध चुनावी आंकड़े यह जरूर संकेत देते हैं कि रामपुर मनिहारन में बीजेपी के लिए मुकाबला आसान नहीं रहने वाला है।
डिजिटल लाइव न्यूज़ | 12 अगस्त 2026
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