
Report By: Kiran Prakash Singh
NCERT की नई कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान पुस्तक में पहली बार आपातकाल पर अध्याय शामिल। कांग्रेस और विपक्ष ने BJP सरकार पर राजनीति का आरोप लगाया।
Date: 25 June 2026
Website: DigitalLiveNews.com
NCERT की 9वीं कक्षा की किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल, राजनीतिक बहस हुई तेज
आपातकाल पर नया अध्याय जोड़ने का फैसला
देश में आपातकाल लागू होने के 50 वर्ष पूरे होने के बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में पहली बार 1975-77 के आपातकाल को विस्तार से शामिल किया है। नई पुस्तक “Understanding Society: India and Beyond” में इस अवधि को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। एनसीईआरटी के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि यह पहली बार है जब कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में आपातकाल पर अलग से सामग्री जोड़ी गई है।
किताब में आपातकाल को कैसे बताया गया?
नई पुस्तक में कहा गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ जनता में असंतोष बढ़ रहा था। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और प्रशासनिक कुप्रबंधन के आरोपों के कारण देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए। पुस्तक के अनुसार जून 1975 में “आंतरिक अशांति” के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया था।
अध्याय में उल्लेख किया गया है कि इस दौरान कई मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई थी और अनेक राजनीतिक नेताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। इसके साथ ही लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़े दबाव और नागरिक स्वतंत्रताओं में आई कमी का भी उल्लेख किया गया है।
भाजपा ने किया फैसले का स्वागत
भारतीय जनता पार्टी ने एनसीईआरटी के इस कदम का स्वागत किया है। दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने कहा कि नई पीढ़ी को देश के इतिहास के इस महत्वपूर्ण दौर की जानकारी होना आवश्यक है। उनके अनुसार छात्रों को यह समझना चाहिए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महत्व क्या है और घोषित एवं अघोषित आपातकाल के बीच क्या अंतर होता है। भाजपा का मानना है कि इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों को शिक्षा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि छात्र लोकतांत्रिक मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कांग्रेस और विपक्ष ने उठाए सवाल
एनसीईआरटी के इस फैसले को लेकर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार की आवश्यकता है, लेकिन सरकार इतिहास के माध्यम से राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है।
वहीं शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने भी इस विषय पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आपातकाल संविधान में मौजूद एक प्रावधान है और इसे केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। राउत ने नोटबंदी और कोविड-19 महामारी के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन विषयों पर भी चर्चा होनी चाहिए।
जयप्रकाश नारायण आंदोलन और लोकतंत्र की सीख
पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलनों का भी विस्तार से वर्णन किया गया है। इसमें बताया गया है कि बिहार और गुजरात में छात्रों तथा नागरिकों को संगठित कर लोकतांत्रिक आंदोलन को मजबूत बनाया गया। अध्याय में यह भी उल्लेख है कि 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनावों में जनता ने मतदान के माध्यम से अपनी राय व्यक्त की और सत्ता परिवर्तन हुआ, जिसने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को प्रदर्शित किया।
इसके अलावा नई पुस्तक में फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसी चुनौतियों को भी लोकतंत्र के सामने मौजूद महत्वपूर्ण मुद्दों के रूप में शामिल किया गया है। साथ ही “Democracy and You” नामक नया सेक्शन छात्रों को लोकतंत्र में उनकी भूमिका और नागरिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाने का प्रयास करता है।