
Report By: Kiran Prakash Singh
मेरठ से स्थानांतरित होकर आईं औषधि निरीक्षक प्रियंका चौधरी ने फिरोजाबाद में कार्यभार संभाला। दवा कारोबार, मेडिकल स्टोरों और गुणवत्ता जांच पर रहेगा फोकस।
Date: 25 June 2026
Website: DigitalLiveNews.com
फिरोजाबाद में नई औषधि निरीक्षक की तैनाती, दवा कारोबार पर रहेगी पैनी नजर
मेरठ से स्थानांतरण के बाद संभाला कार्यभार
जनपद फिरोजाबाद में औषधि विभाग को नई जिम्मेदारी मिल गई है। मेरठ से स्थानांतरित होकर आईं औषधि निरीक्षक प्रियंका चौधरी ने 24 जून को अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया। उनके पदभार संभालने के साथ ही जिले में दवा कारोबार, मेडिकल स्टोरों की कार्यप्रणाली और औषधियों की गुणवत्ता को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग और आम जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि नई औषधि निरीक्षक जिले में दवा वितरण प्रणाली को कितना प्रभावी और पारदर्शी बना पाती हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती दवा कारोबार में नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
नकली और अवैध दवाओं पर होगी सख्त निगरानी
फिरोजाबाद में बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर संचालित हैं। ऐसे में नकली, एक्सपायरी और बिना अनुमति बेची जाने वाली दवाओं पर नियंत्रण बनाए रखना औषधि विभाग की प्रमुख जिम्मेदारी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि दवा बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण और सैंपलिंग अभियान बेहद जरूरी हैं। यदि कहीं भी नकली दवाओं की बिक्री, अवैध भंडारण या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
नई औषधि निरीक्षक से उम्मीद की जा रही है कि वे दवा कारोबार से जुड़े सभी पहलुओं पर बारीकी से नजर रखेंगी और जनता को सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएंगी।
मेडिकल स्टोरों की होगी गहन जांच
प्रियंका चौधरी के कार्यकाल में मेडिकल स्टोरों की कार्यप्रणाली की विस्तृत जांच होने की संभावना है। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि सभी मेडिकल स्टोर निर्धारित नियमों और लाइसेंस शर्तों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं या नहीं।
इसके तहत दवाओं के स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, लाइसेंस की वैधता और दवा भंडारण की व्यवस्था की भी जांच की जा सकती है। इससे अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और दवा बिक्री प्रणाली अधिक व्यवस्थित बन सकेगी।
लाइसेंस सत्यापन और गुणवत्ता जांच पर रहेगा फोकस
औषधि निरीक्षक की जिम्मेदारी केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं होती, बल्कि दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उनके प्रमुख कार्यों में शामिल है। इसी कारण लाइसेंस सत्यापन, औषधियों की सैंपलिंग और प्रयोगशाला जांच को प्राथमिकता दी जा सकती है।
विशेष रूप से जीवनरक्षक दवाओं और अधिक उपयोग में आने वाली औषधियों की गुणवत्ता पर नजर रखी जाएगी। यदि किसी दवा में मानकों के अनुरूप गुणवत्ता नहीं पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह कदम मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की होगी परीक्षा
नई तैनाती के बाद अब जिले में दवा कारोबार की पारदर्शिता और जवाबदेही एक महत्वपूर्ण विषय बन गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोग उम्मीद कर रहे हैं कि विभाग की निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
जनता भी चाहती है कि मेडिकल स्टोरों पर मिलने वाली दवाएं सुरक्षित, प्रमाणित और निर्धारित मानकों के अनुरूप हों। ऐसे में प्रियंका चौधरी के सामने विभागीय जिम्मेदारियों के साथ-साथ जनविश्वास को मजबूत करने की भी चुनौती होगी।
फिलहाल उनकी नियुक्ति को स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि नई औषधि निरीक्षक की कार्यशैली जिले के दवा कारोबार में कितनी पारदर्शिता, अनुशासन और जवाबदेही ला पाती है। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में यह नियुक्ति महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
— DigitalLiveNews.com