गांधी के नाम पर भरोसे की राजनीति फिर गरमाई बहस

Report By: Kiran Prakash Singh

नॉर्वे की पत्रकार के सवाल पर भारत ने गांधी का हवाला दिया। बयान के बाद बीजेपी, आरएसएस और गांधी की राजनीति पर नई बहस छिड़ गई।

Digital Live News
22/05/2026

गांधी के नाम पर भरोसे की राजनीति फिर चर्चा में

नॉर्वे की पत्रकार के सवाल से उठा बड़ा मुद्दा

हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय संवाद के दौरान नॉर्वे की महिला पत्रकार हेली लिंग ने भारतीय मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाया। पत्रकार ने पूछा कि जब भारत में मीडिया फ्रीडम को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं, तब दुनिया भारत पर भरोसा क्यों करे? इस सवाल का जवाब देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव सीबी जॉर्ज ने कहा कि “भारत महात्मा गांधी का देश है, इसलिए दुनिया भारत पर भरोसा कर सकती है।” यही बयान अब देश की राजनीति और सोशल मीडिया पर नई बहस का कारण बन गया है।

गांधी का नाम ही क्यों आया सामने?

सीबी जॉर्ज के बयान के बाद विपक्षी विचारधारा से जुड़े लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर उन्होंने महात्मा गांधी का ही नाम क्यों लिया। आलोचकों का कहना है कि यदि वर्तमान सरकार और उसके समर्थक लगातार राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और वैकल्पिक विचारधारा की बात करते हैं, तो फिर दुनिया के सामने भरोसे के प्रतीक के तौर पर गांधी का ही सहारा क्यों लेना पड़ा। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि की बात आती है, तब दुनिया अभी भी महात्मा गांधी को ही भारत की पहचान मानती है।

गांधी और बीजेपी-RSS पर पुरानी बहस फिर तेज

देश की राजनीति में महात्मा गांधी और आरएसएस-बीजेपी के रिश्तों को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि बीजेपी और उससे जुड़े कुछ संगठनों के नेताओं ने समय-समय पर गांधी की विचारधारा का विरोध किया। कई घटनाओं में नाथूराम गोडसे के समर्थन वाले बयान और विवाद भी सामने आए, जिन पर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ। हालांकि बीजेपी आधिकारिक तौर पर महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता मानती है और उनके विचारों को सम्मान देने की बात कहती रही है। लेकिन सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानबाजी में यह मुद्दा बार-बार उभरता रहता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गांधी की पहचान

महात्मा गांधी केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अहिंसा और सत्याग्रह के प्रतीक माने जाते हैं। अमेरिका से लेकर यूरोप और अफ्रीका तक कई देशों में गांधी के विचारों का अध्ययन किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया है। ऐसे में जब भारत की लोकतांत्रिक छवि या नैतिक मूल्यों पर सवाल उठते हैं, तब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गांधी का नाम एक मजबूत नैतिक संदर्भ के रूप में सामने आता है। यही वजह है कि भारतीय कूटनीति में भी अक्सर गांधी का उल्लेख किया जाता है।

बयान के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

सीबी जॉर्ज के बयान के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा नजर आया। एक पक्ष का कहना है कि गांधी भारत की सबसे बड़ी वैश्विक पहचान हैं और उनका नाम लेना स्वाभाविक है। वहीं दूसरा पक्ष इसे राजनीतिक पाखंड करार दे रहा है। कई यूजर्स ने कहा कि यदि देश में गांधी की विचारधारा का सही सम्मान होता, तो उनके नाम का इस्तेमाल केवल अंतरराष्ट्रीय मंचों तक सीमित नहीं रहता। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारत की राजनीति में महात्मा गांधी आज भी सबसे प्रभावशाली और संवेदनशील प्रतीकों में से एक हैं।

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