‘The Kerala Story 2’ केस जज सुश्रुत धर्माधिकारि बने मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस

Report By: Kiran Prakash Singh

जस्टिस सुश्रुत धर्माधिकारि केरल हाईकोर्ट से मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त, ‘The Kerala Story 2’ केस में सुर्खियों में रहे।

digitallivenews:-

भारतीय न्यायिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। केरल हाईकोर्ट में कार्यरत जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारि को मद्रास हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) नियुक्त किया गया है। वह 6 मार्च, 2026 से पदभार संभालेंगे और वर्तमान चीफ जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव का स्थान लेंगे, जो 5 मार्च को सेवानिवृत्त होंगे।

‘The Kerala Story 2’ केस में सुश्रुत धर्माधिकारि की पहचान

जस्टिस धर्माधिकारि हाल ही में केरल हाईकोर्ट की दो-जज डिवीजन बेंच का हिस्सा रहे थे, जिन्होंने ‘The Kerala Story 2 – Goes Beyond’ फिल्म के रिलीज़ को लेकर दाखिल याचिकाओं की सुनवाई की। बेंच में उनके साथ जस्टिस PV बालकृष्णन थे। मामले में चुनौती यह थी कि पहले एकल जज ने फिल्म की रिलीज़ 15 दिन के लिए स्थगित कर दी थी।

सुनवाई के दौरान, बेंच ने यह सवाल उठाया कि क्या एकल जज उन याचिकाओं को सुन सकते हैं जो असल में सार्वजनिक हित से जुड़ी हुई थीं (PIL)। फिल्म निर्माता ने तत्काल राहत की गुहार लगाई थी, लेकिन डिवीजन बेंच ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा और सुनवाई के अंत में कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया।

तीन दशक से अधिक का विधिक अनुभव

जस्टिस धर्माधिकारि का जन्म 8 जुलाई, 1966 को रायपुर में हुआ। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से वाणिज्य और कानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। 1992 में उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर में वकालत शुरू की। इस दौरान उन्होंने कई प्रमुख संस्थाओं जैसे इनकम टैक्स विभाग और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया का प्रतिनिधित्व किया।

अप्रैल 2016 में उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और मार्च 2018 में स्थायी न्यायाधीश के रूप में पुष्टि हुई। अप्रैल 2025 में उन्होंने केरल हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, जिससे उनकी न्यायिक अनुभव सीमा प्रदेशों तक विस्तारित हो गई।

मद्रास हाईकोर्ट में नेतृत्व का नया दौर

जस्टिस धर्माधिकारि की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब मुक्त अभिव्यक्ति, डिजिटल गवर्नेंस और संवैधानिक विवाद जैसे जटिल मामले उच्च न्यायालय में बढ़ रहे हैं। उनके पास तीन दशक से अधिक का कानूनी और न्यायिक अनुभव है, और उनके नेतृत्व में मद्रास हाईकोर्ट तमिलनाडु के विविध और विशाल डॉकेट के मामलों को देखेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि उनके कार्यकाल में न्यायिक प्रक्रिया में स्थिरता और उच्च न्यायालय की संस्थागत निरंतरता बनी रहेगी। इसके साथ ही, उनके निर्णय राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी मानदंडों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

जस्टिस धर्माधिकारि की नियुक्ति को भारतीय न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण ट्रांज़िशन माना जा रहा है। मद्रास हाईकोर्ट भारत के सबसे पुराने और व्यस्त संवैधानिक अदालतों में से एक है, और उनके नेतृत्व में अदालत की प्रतिष्ठा और न्यायिक गुणवत्ता को बनाए रखने की उम्मीद है।

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