हाईकोर्ट ने बाहुबलियों के शस्त्र लाइसेंस पर मांगी रिपोर्ट

Report By: Kiran Prakash Singh

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के बाहुबलियों के शस्त्र लाइसेंस, आपराधिक रिकॉर्ड और सरकारी सुरक्षा पर सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।

Digital Live News
22/05/2026

हाईकोर्ट ने तलब की बाहुबलियों की आपराधिक कुंडली

गन कल्चर पर सख्त हुआ इलाहाबाद हाईकोर्ट

उत्तर प्रदेश में बढ़ते गन कल्चर और प्रभावशाली लोगों को दिए गए शस्त्र लाइसेंसों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रदेश के कई चर्चित बाहुबलियों और प्रभावशाली नेताओं की आपराधिक कुंडली तलब करते हुए सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में कोर्ट ने साफ कहा कि कानून का पालन हर नागरिक पर समान रूप से लागू होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव के आधार पर विशेष छूट नहीं दी जा सकती।

कई बाहुबलियों के लाइसेंस जांच के घेरे में

हाईकोर्ट ने जिन नामों पर विशेष रूप से जानकारी मांगी है, उनमें पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, कुंडा विधायक राजा भइया, पूर्व सांसद धनंजय सिंह, सुशील सिंह और विनीत सिंह जैसे कई प्रभावशाली नाम शामिल हैं। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि इन लोगों के खिलाफ कितने आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और किन परिस्थितियों में इनके शस्त्र लाइसेंस जारी या नवीनीकृत किए गए। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या लाइसेंस जारी करते समय सभी नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

संतकबीर नगर की याचिका से खुला मामला

यह पूरा मामला संतकबीर नगर निवासी जयशंकर द्वारा दाखिल जनहित याचिका के बाद सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रदेश में नियमों को ताक पर रखकर प्रभावशाली लोगों को हथियारों के लाइसेंस दिए जा रहे हैं। साथ ही कई ऐसे लोगों के लाइसेंस भी नवीनीकृत हो रहे हैं जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि सरकार की लाइसेंस नीति और उसकी पारदर्शिता की जांच कराई जाए।

सरकार के हलफनामे से चौंका कोर्ट

सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि उत्तर प्रदेश में 10 लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंस जारी हैं। इनमें से 6 हजार से ज्यादा ऐसे लोगों के पास हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कई चर्चित बाहुबलियों के नाम शामिल नहीं थे। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार पूरी और सही जानकारी पेश करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रभावशाली व्यक्ति का नाम जानबूझकर छिपाया गया है तो यह गंभीर मामला माना जाएगा।

सरकारी सुरक्षा पर भी मांगा ब्यौरा

हाईकोर्ट ने केवल शस्त्र लाइसेंस ही नहीं बल्कि बाहुबलियों को दी गई सरकारी सुरक्षा पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि किन आधारों पर इन लोगों को सुरक्षा प्रदान की गई और वर्तमान में कितने सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। अदालत ने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से दी जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। अब इस मामले की अगली सुनवाई में सरकार को विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस और वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े स्तर पर समीक्षा हो सकती है।

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