गुरुग्राम दुष्कर्म केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश

Report By: Kiran Prakash Singh

गुरुग्राम दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SIT को पॉक्सो कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दी, पुलिस पर जताई सख्त नाराजगी।

📅 Date: 12 May 2026
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गुरुग्राम दुष्कर्म मामला: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, SIT जांच पूरी

सुप्रीम कोर्ट ने SIT को दी चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति

गुरुग्राम में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में Supreme Court of India ने बड़ा कदम उठाते हुए विशेष जांच दल यानी SIT को जांच रिपोर्ट पॉक्सो अदालत में दाखिल करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने कहा कि संबंधित पुलिस थाने के माध्यम से अब आरोपपत्र दाखिल कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है।


समयसीमा में जांच पूरी करने पर SIT की तारीफ

मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की बेंच ने निर्धारित समयसीमा के भीतर जांच पूरी करने के लिए SIT की सराहना की। अदालत ने कहा कि गंभीर मामलों में तेज और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।


पुलिस और बाल कल्याण समिति पर कड़ी फटकार

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पुलिस और गुरुग्राम की बाल कल्याण समिति के रवैये पर तीखी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि मामले में पुलिस का व्यवहार शर्मनाक, लापरवाह और असंवेदनशील रहा। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “आपको शर्म आनी चाहिए, क्या सरकार अपराध से इसी तरह निपटती है?”


महिला IPS अधिकारियों की बनाई गई थी SIT

इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महिला आईपीएस अधिकारियों की विशेष जांच टीम गठित की थी। इसमें अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक Kala Ramachandran, पुलिस अधीक्षक Dr. Anshu Singla और उपायुक्त पुलिस Jasleen Kaur शामिल थीं। अदालत ने जांच को स्वतंत्र और तटस्थ बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।


महिला न्यायिक अधिकारी को सौंपी जाएगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि इस मामले की सुनवाई किसी महिला न्यायिक अधिकारी की अध्यक्षता वाली विशेष POCSO अदालत में कराई जाए। अदालत का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में पीड़िता की सुरक्षा और मानसिक स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।


दो महीने तक बच्ची के साथ होता रहा उत्पीड़न

पुलिस के अनुसार, सेक्टर-54 स्थित एक सोसाइटी में दो महिला घरेलू सहायिकाओं और उनके एक पुरुष साथी पर बच्ची के साथ लगभग दो महीने तक यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद सेक्टर-53 पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता और POCSO अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।


पीड़िता के परिवार की चिंताओं को बताया गया नजरअंदाज

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस अधिकारियों ने जिस तरह से मामले की जांच की, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि पीड़िता के बयान को कमजोर करने और उसके माता-पिता की चिंताओं को अतिरंजित दिखाने की कोशिश की गई। अदालत ने इसे बेहद गंभीर माना और कहा कि बच्ची को अपराध से ज्यादा भयावह अनुभव जांच प्रक्रिया के दौरान झेलने पड़े।


गुरुग्राम दुष्कर्म मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने साफ कर दिया है कि बच्चों से जुड़े अपराधों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब सबकी नजर पॉक्सो अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई पर टिकी हुई है।


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