हिंद मेडिकल कॉलेज में ट्रस्ट की जंग, रिचा मिश्रा ने लगाए आरोप

Report By: Kiran Prakash Singh

बाराबंकी के हिंद मेडिकल कॉलेज में ट्रस्ट को लेकर विवाद गहराया। रिचा मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दस्तावेज, बैंक खाते और संस्थान संचालन पर गंभीर दावे किए।

हिंद मेडिकल कॉलेज में ट्रस्ट की जंग, रिचा मिश्रा के गंभीर दावों से बढ़ा विवाद

डिजिटल लाइव न्यूज़ | 12 अगस्त 2026 | digitallivenews.com

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी स्थित हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (HIMS) में ट्रस्ट के अधिकार और संचालन को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। ट्रस्ट की पूर्व चेयरपर्सन रहीं डॉ. रिचा मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का जवाब दिया और संस्थान की ट्रस्ट व्यवस्था, बैठकों, दस्तावेजों, बैंक खातों, पुलिस शिकायतों और अस्पताल के संचालन को लेकर कई गंभीर दावे किए।

दूसरी ओर, सरोजनी वर्मा और उनके बेटे विकास की ओर से रिचा मिश्रा और डॉक्टर सचान पर आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में मामला अब आरोप और पलटवार के बीच फंस गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और विवाद से जुड़े कई पहलू कानूनी प्रक्रिया में हैं।

ट्रस्ट की संरचना को लेकर रिचा मिश्रा का दावा

रिचा मिश्रा के मुताबिक, हिंद इंस्टीट्यूट से जुड़े ट्रस्ट में शुरुआत में सात ट्रस्टी थे। उनका दावा है कि इनमें से दो ट्रस्टियों का निधन हो चुका है, जबकि दो ने इस्तीफा दे दिया। उनके मुताबिक अब ट्रस्ट में तीन ट्रस्टी बचे हैं।

रिचा मिश्रा ने दावा किया कि वर्ष 2004 में सभी ट्रस्टी मौजूद थे और उसी समय उन्हें तथा डॉक्टर सचान को ट्रस्ट के संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी। उनका कहना है कि इसी व्यवस्था के तहत लंबे समय तक संस्थान का संचालन होता रहा।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इस दौरान संस्थान का लगातार विस्तार हुआ और कई नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए।

मेडिकल कॉलेज में हजारों छात्रों के भविष्य का सवाल

रिचा मिश्रा के अनुसार हिंद इंस्टीट्यूट में मेडिकल शिक्षा के साथ बीएससी नर्सिंग, GNM नर्सिंग, फार्मेसी और MSc नर्सिंग जैसे पाठ्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।

उनका दावा है कि संस्थान में करीब तीन हजार छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कैंसर सेंटर और आधुनिक कैंसर मशीन लगाए जाने का भी जिक्र किया।

यही वजह है कि ट्रस्ट के विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल संस्थान में पढ़ने वाले छात्रों और अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों को लेकर उठ रहा है। अगर प्रबंधन को लेकर विवाद लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर संस्थान की रोजमर्रा की व्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

रिचा ने ट्रस्ट में दखल का लगाया आरोप

रिचा मिश्रा ने दावा किया कि करीब दो साल पहले एक पूर्व बैंक कर्मचारी को संस्थान में CEO बनाया गया था। उनके अनुसार, इसी दौरान ट्रस्ट के नेतृत्व और संचालन को लेकर विवाद की शुरुआत हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने डॉक्टर सचान का विश्वास हासिल कर दस्तावेजों के जरिए ट्रस्ट में नेतृत्व परिवर्तन की कोशिश की। उन्होंने मानवेन्द्र सिंह को चेयरमैन बनाए जाने और डॉक्टर सचान को हटाने की कथित कोशिश का भी दावा किया।

रिचा मिश्रा ने 16 जनवरी और 3 फरवरी को हुई बैठकों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कुछ ऐसे ट्रस्टियों को बैठक में मौजूद दिखाया गया, जो वास्तव में वहां मौजूद नहीं थे। उनका दावा है कि बाद में संबंधित लोगों ने लिखित रूप में बैठक में शामिल नहीं होने की बात कही।

इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है

दस्तावेजों और ट्रस्ट के अधिकार पर उठे सवाल

रिचा मिश्रा ने सरोजनी वर्मा के पति सुनील वर्मा का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक सुनील वर्मा ट्रस्टी थे और वर्ष 2012 में उनका निधन हो गया था।

रिचा मिश्रा का दावा है कि ट्रस्ट के नियमों के अनुसार किसी ट्रस्टी की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिसों को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है। उनका आरोप है कि वर्ष 2012 के बाद से अब तक परिवार की ओर से ऐसी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

इसी आधार पर उन्होंने सरोजनी वर्मा के ट्रस्टी होने के दावे पर सवाल उठाया है। हालांकि, ट्रस्ट की वास्तविक कानूनी स्थिति का अंतिम फैसला संबंधित दस्तावेजों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

कोर्ट पहुंचा विवाद, अस्पताल की व्यवस्था पर भी चिंता

ट्रस्ट से जुड़ा विवाद अब अदालत तक पहुंच चुका है। रिचा मिश्रा के मुताबिक परिसर में कुछ लोगों के प्रवेश को लेकर पहले कोर्ट से आदेश मिले थे। इसके बाद मामला दूसरी अदालत तक पहुंचा और उनके अनुसार विचाराधीन मामले के दौरान संबंधित लोगों को ट्रस्टी होने के दावे के आधार पर परिसर में आने की अनुमति दी गई।

इसके साथ ही रिचा मिश्रा ने संस्थान में अभद्र व्यवहार और हंगामे के भी आरोप लगाए। उन्होंने नर्सिंग छात्राओं, कर्मचारियों, कॉलेज प्रिंसिपल और अपनी महिला PS के साथ कथित बदसलूकी का दावा किया। उनके मुताबिक इन मामलों को लेकर पुलिस और अधिकारियों को शिकायतें दी गई हैं।

वहीं अस्पताल के सॉफ्टवेयर सिस्टम को लेकर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि कुछ लोगों ने सॉफ्टवेयर सिस्टम से जुड़े तार काट दिए, जिससे करीब एक सप्ताह तक कामकाज प्रभावित हुआ।

उन्होंने संस्थान के बैंक खातों को फ्रीज किए जाने का भी दावा किया। रिचा मिश्रा के अनुसार इससे कर्मचारियों के वेतन भुगतान में परेशानी हुई और कुछ भुगतान नकद माध्यम से करने की स्थिति बनी।

फिलहाल हिंद इंस्टीट्यूट में आरोपों और जवाबी आरोपों का दौर जारी है। ट्रस्ट का वास्तविक अधिकार किसके पास है, कौन से दस्तावेज वैध हैं और लगाए गए आरोप कितने सही हैं, इसका अंतिम निर्धारण जांच और अदालत की प्रक्रिया से ही हो सकेगा।

सबसे अहम बात यह है कि इस विवाद का असर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई, अस्पताल के मरीजों और कर्मचारियों की व्यवस्था पर नहीं पड़ना चाहिए। ऐसे में उम्मीद है कि कानूनी प्रक्रिया के जरिए जल्द स्थिति स्पष्ट होगी और संस्थान का संचालन सुचारू रूप से जारी रहेगा।

डिजिटल लाइव न्यूज़ | 12 अगस्त 2026
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