
Report By: Kiran Prakash Singh
सुप्रीम कोर्ट ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों से पूछा कि उन्हें नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए। कोर्ट ने जवाब मांगा है।
Digital Live News | 9 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
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BCCI पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त सवाल, नेशनल स्पोर्ट्स एक्ट पर मांगा जवाब
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई में महत्वपूर्ण सवाल सामने आया। अदालत ने BCCI और सभी राज्य क्रिकेट संघों से पूछा कि उन्हें नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मुद्दे पर BCCI और राज्य क्रिकेट संघों की ओर से पेश वकीलों से जवाब लेने को कहा है।
अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित पक्ष अपने पदाधिकारियों की सेवा शर्तों को लेकर निर्देश प्राप्त करें और स्पष्ट करें कि ये शर्तें लागू हो चुके 2025 के कानून के तहत क्यों नहीं आती हैं।
BCCI और राज्य संघों से कोर्ट का सवाल
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में BCCI से जुड़े मामले में कुछ क्रिकेट संस्थाओं की अर्जियों पर सुनवाई हुई। इसी दौरान अदालत ने क्रिकेट प्रशासन को लेकर यह अहम सवाल उठाया।
पीठ में चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों के वकीलों से इस मुद्दे पर अपने पक्ष को स्पष्ट करने के लिए कहा।
सुप्रीम कोर्ट का सवाल मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि जब नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 लागू हो चुका है, तो क्रिकेट प्रशासन से जुड़े पदाधिकारियों की सेवा शर्तों को इससे अलग रखने का आधार क्या है।
2014 से चल रहा है BCCI से जुड़ा मामला
सुप्रीम कोर्ट में BCCI से संबंधित यह मामला 2014 से लंबित है। इस दौरान क्रिकेट प्रशासन में सुधार को लेकर कई अर्जियां अदालत के सामने आती रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन भी किया था। इस समिति को क्रिकेट प्रशासन में सुधार के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
कमेटी की सिफारिशों में BCCI के लिए एक नया संविधान तैयार करने और संस्था के कामकाज में सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल थे।
BCCI संविधान में कार्यकाल को लेकर बदलाव
सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेट प्रशासन में सुधार से जुड़ी कई सिफारिशों को स्वीकार किया था। इनमें BCCI के पदाधिकारियों के कार्यकाल से जुड़ा मुद्दा भी काफी महत्वपूर्ण रहा।
सितंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने BCCI के संविधान में प्रस्तावित बदलावों को मंजूरी दी थी। इसके तहत कोई पदाधिकारी लगातार 12 साल तक क्रिकेट प्रशासन में पद पर रह सकता था।
इस व्यवस्था में छह साल राज्य क्रिकेट एसोसिएशन और छह साल BCCI में बिताने की अनुमति का प्रावधान था। इसके बाद पदाधिकारी को तीन साल के कूलिंग-ऑफ पीरियड से गुजरना होता था।
दो लगातार कार्यकाल की भी मिली थी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद पदाधिकारियों को राज्य क्रिकेट एसोसिएशन और BCCI दोनों स्तरों पर लगातार दो कार्यकाल तक एक ही पद पर बने रहने की अनुमति दी गई थी।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूर BCCI संविधान में अलग व्यवस्था थी। उसके तहत राज्य क्रिकेट एसोसिएशन या BCCI में लगातार तीन-तीन साल के दो कार्यकाल पूरे करने वाले पदाधिकारियों के लिए तीन साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड जरूरी था।
अब नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 लागू होने के बाद BCCI और राज्य क्रिकेट संघों की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ताजा सवाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब जवाब पर टिकी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों की ओर से पेश वकीलों को इस मुद्दे पर निर्देश लेने को कहा है। अदालत यह जानना चाहती है कि उनके पदाधिकारियों की सेवा शर्तें नए कानून के तहत क्यों नहीं आनी चाहिए।
इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई में BCCI और राज्य क्रिकेट संघों की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा। अदालत के सवाल के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्रिकेट प्रशासन की मौजूदा व्यवस्था और नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 के बीच कानूनी स्थिति किस तरह स्पष्ट होती है।
BCCI से जुड़ा यह मामला लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है और समय-समय पर अदालत के हस्तक्षेप के चलते भारतीय क्रिकेट प्रशासन में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। अब नए खेल कानून के संदर्भ में अदालत का यह सवाल क्रिकेट संस्थाओं के कामकाज और पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर आगे की दिशा तय कर सकता है।
Digital Live News | 9 सितंबर 2026
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