रुपया 95 के पार, डॉलर के आगे टूटा बाजार

Report By: Kiran Prakash Singh

डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड गिरावट पर 95.27 तक पहुंचा। कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश निकासी से बढ़ा दबाव।

डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, आर्थिक दबाव बढ़ा


95 के पार गिरा रुपया, बना नया रिकॉर्ड

भारतीय रुपया 30 अप्रैल को अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में यह 95.02 प्रति डॉलर पर खुला और गिरते हुए 95.27 के रिकॉर्ड लो लेवल तक पहुंच गया।

यह गिरावट सिर्फ एक दिन की नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों से रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है, जिससे यह साल 2026 में अब तक लगभग 6% तक कमजोर हो चुका है।


तेल की कीमतों ने बढ़ाया संकट

रुपये की गिरावट का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है।

वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड 120–126 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है, जो कई सालों का उच्च स्तर है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का मतलब है कि देश को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे रुपया कमजोर होता है।


विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर

रुपये पर दबाव का दूसरा बड़ा कारण है विदेशी निवेशकों (FPI) की निकासी

वैश्विक तनाव, खासकर पश्चिम एशिया में हालात और अमेरिकी नीतियों के चलते निवेशक भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर जैसी सुरक्षित करेंसी में निवेश कर रहे हैं।

इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया और कमजोर हो जाता है।


RBI की कोशिशें, लेकिन असर सीमित

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार फॉरेक्स मार्केट में हस्तक्षेप कर रहा है ताकि रुपये को संभाला जा सके।

लेकिन तेल की बढ़ती कीमतें, मजबूत डॉलर और वैश्विक तनाव जैसे बड़े कारणों के सामने RBI की कोशिशें अभी पूरी तरह सफल नहीं हो पा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही हाल रहा, तो रुपया आगे और कमजोर हो सकता है।


आम आदमी पर सीधा असर

रुपये की गिरावट का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा:

  • विदेश यात्रा और पढ़ाई महंगी हो जाएगी
  • स्मार्टफोन, लैपटॉप जैसे आयातित सामान महंगे होंगे
  • पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना
  • महंगाई (Inflation) में और बढ़ोतरी

यानी यह सिर्फ बाजार की खबर नहीं, बल्कि हर घर की आर्थिक स्थिति से जुड़ा मुद्दा है।


रुपये की यह गिरावट दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी वैश्विक कारकों पर काफी निर्भर है।

  • तेल महंगा → डॉलर की मांग बढ़ी
  • निवेशक निकले → रुपया कमजोर
  • RBI की सीमित भूमिका

अगर आने वाले समय में तेल की कीमतें और वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है।

Also Read

ईशा छाबड़ा की ‘गुलिस्तान चले’ म्यूजिक वीडियो में ए.आर. रहमान का जादू

देव दीपावली 2025: काशी में सिर्फ दीये नहीं, होटल रेट्स और रिकॉर्ड भी जलेंगे!

सुनील पाल की हालात पर फैंस हुए चिंतित, सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें

सोनम वांगचुक के अनशन पर AIMIM ने केंद्र सरकार को घेरा

आवास वितरण कार्यक्रम में बवाल, रो पड़ीं BJP विधायक

You Might Also Like

वैभव सूर्यवंशी के लिए BCCI का बड़ा प्लान, लंबा करियर लक्ष्य

क्रिकेट में अनोखा संयोग, एक ही 3 बल्लेबाजों को मिली हैट्रिक

TV Serial Spoilers: अनुपमा का लोन रिजेक्ट, अनु को नौकरी से निकालेगी मीरा

जन्माष्टमी पर करिश्मा तन्ना ने रिवील किया बेटे का खास नाम

कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट? CJP से अलग होकर बनाई नई पार्टी

FSSAI का दावा: क्या तीन वक्त खाना जरूरी नहीं? जानें पूरा सच

अखिलेश की CJP प्रवक्ता से मुलाकात पर BJP का हमला, योगी का जिक्र

सोनिया गांधी की किताब अब हार्परकॉलिन्स से होगी प्रकाशित

Select Your City