
Report By: Kiran Prakash Singh
मेरठ में प्रदर्शनकारियों पर SSP अविनाश पांडे के थप्पड़ मारने के वायरल वीडियो के बाद सियासत तेज हो गई। कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने कार्रवाई की मांग की, जबकि विपक्ष ने सरकार को घेरा।
📅 दिनांक: 10 जुलाई 2026
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मेरठ थप्पड़कांड पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने SSP पर उठाए सवाल
थप्पड़कांड के बाद तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी
उत्तर प्रदेश के मेरठ में प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर SSP अविनाश पांडे द्वारा थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दल लगातार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। यह प्रदर्शन 20 वर्षीय दलित छात्रा ललिता गौतम की हत्या के मामले में न्याय और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर किया गया था।
राजेंद्र पाल गौतम ने SSP पर लगाया गंभीर आरोप
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी को तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने SSP पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि पुलिस की कार्रवाई लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार के अनुरूप नहीं थी। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर सदन तक आवाज उठाएगी।
विपक्ष का सरकार पर हमला, सपा और आज़ाद समाज पार्टी भी मुखर
इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी और आज़ाद समाज पार्टी सहित कई विपक्षी दलों ने भी योगी सरकार को निशाने पर लिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर घटना की निंदा करते हुए पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए। वहीं, चंद्रशेखर आज़ाद ने भी SSP के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की बात कही।
पुलिस का पक्ष भी आया सामने
विवाद बढ़ने के बाद SSP अविनाश पांडे ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने माहौल को उग्र बनाने की कोशिश की थी और पुलिस पर भी हमला हुआ। उनके अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यूनतम आवश्यक बल का इस्तेमाल किया गया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन बिना अनुमति के किया गया था और इस मामले में कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारियां भी की गई हैं।
जांच और कार्रवाई पर टिकीं सबकी निगाहें
वायरल वीडियो के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर तूल पकड़ लिया है। एक ओर विपक्ष निष्पक्ष कार्रवाई और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं पुलिस अपने कदम को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बता रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं और जांच का अंतिम निष्कर्ष क्या सामने आता है। यह मामला फिलहाल जांच और राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।