अविमुक्तेश्वरानंद केस: हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी रिपोर्ट

Report By: Kiran Prakash Singh

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर कथित झूठे आरोप के मामले में यूपी सरकार से एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है।

digitallivenews.com | 11 जुलाई 2026

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर कथित झूठे आरोप का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, सरकार से एक हफ्ते में रिपोर्ट तलब

 इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े कथित झूठे यौन शोषण आरोप के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे। साथ ही, अदालत ने मामले से जुड़े आशुतोष ब्रह्मचारी को भी पक्षकार बनाए जाने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

 पत्रकार की याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप

यह याचिका शाहजहांपुर निवासी पत्रकार रमाशंकर दीक्षित की ओर से संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि 18 फरवरी 2026 को तीन अज्ञात व्यक्तियों ने उनसे संपर्क कर कथित रूप से धन का प्रलोभन दिया और शंकराचार्य के खिलाफ उनकी नाबालिग बेटियों के नाम पर झूठा यौन शोषण का आरोप लगाने का दबाव बनाया। याचिकाकर्ता ने इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक जांच और सुरक्षा की मांग की है।

 धमकी और सुरक्षा का भी मुद्दा उठा

याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रस्ताव ठुकराने के बाद उन्हें और उनके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिलीं। याचिका में यह भी कहा गया है कि उनके घर की कथित रूप से रेकी कराई गई और सुरक्षा के लिए तैनात कुछ पुलिसकर्मियों ने भी बयान बदलने का दबाव बनाया। इन दावों की अभी न्यायिक प्रक्रिया के तहत जांच की जानी बाकी है और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

 परिवार की सुरक्षा की मांग

याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता की दो नाबालिग बेटियां हैं और पूरे परिवार की सुरक्षा खतरे में है। उन्होंने अदालत से अपने परिवार को आवश्यक सुरक्षा और कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराने की मांग की है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से रिपोर्ट तलब की है ताकि आगे की सुनवाई में सभी तथ्यों पर विचार किया जा सके।

 मामला न्यायिक प्रक्रिया में, रिपोर्ट के बाद आगे होगी सुनवाई

यह मामला फिलहाल विचाराधीन (Sub Judice) है और अदालत ने अभी किसी भी पक्ष के आरोपों या दावों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। सरकार की रिपोर्ट और संबंधित पक्षों का जवाब आने के बाद हाईकोर्ट आगे की सुनवाई करेगा। उल्लेखनीय है कि इससे जुड़े अन्य मामलों में पहले भी न्यायिक कार्यवाही हो चुकी है, लेकिन वर्तमान याचिका अलग तथ्यों और मांगों पर आधारित है। इसलिए अंतिम निर्णय अदालत की आगामी सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।

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