
Report By: Kiran Prakash Singh
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान दौरे पर रणनीतिक साझेदारी, क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा, रक्षा, निवेश और कनेक्टिविटी पर चर्चा करेंगे।
उज्बेकिस्तान दौरे से सेंट्रल एशिया में भारत की नई रणनीति, PM मोदी का बड़ा एजेंडा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 29 अगस्त 2026 से उज्बेकिस्तान के दौरे पर जा रहे हैं। भारत की विदेश नीति और सेंट्रल एशिया के साथ रणनीतिक रिश्तों के लिहाज से यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।
भारत के लिए यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और व्यापार जैसे क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में उज्बेकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाना भारत की सेंट्रल एशिया रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।
11 साल बाद उज्बेकिस्तान में PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की पिछली यात्रा वर्ष 2015 में हुई थी। इसके बाद करीब 11 साल के अंतराल के बाद उनका यह दौरा हो रहा है। इस दौरान दोनों देशों के संबंधों में कई क्षेत्रों में विस्तार हुआ है।
प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। इसमें व्यापार और निवेश से लेकर रक्षा और सुरक्षा तक कई मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। दोनों पक्ष मौजूदा सहयोग की समीक्षा करने के साथ भविष्य की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा करेंगे।
क्रिटिकल मिनरल्स और दुर्लभ मृदा पर खास नजर
भारत तेजी से आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। ऐसे में क्रिटिकल मिनरल्स और दुर्लभ मृदा तत्व महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इन संसाधनों का इस्तेमाल कई आधुनिक उद्योगों और तकनीकी उत्पादों में किया जाता है।
उज्बेकिस्तान के साथ इस क्षेत्र में सहयोग भारत के लिए रणनीतिक रूप से उपयोगी हो सकता है। भारतीय राजदूत स्मिता पंत के अनुसार, प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा जैसे विषयों पर चर्चा एजेंडे में शामिल हैं।
इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नए अवसर तलाशने पर भी बातचीत हो सकती है।
व्यापार और निवेश में बड़ी बढ़ोतरी
भारत और उज्बेकिस्तान के आर्थिक संबंधों में पिछले वर्षों में महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय राजनयिक के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की वर्ष 2015 की यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार में करीब 300 प्रतिशत और निवेश में 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
यह आंकड़े दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संपर्क को दर्शाते हैं। आने वाले समय में व्यापार और निवेश को और बढ़ाने के लिए नई संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है।
भारत के लिए सेंट्रल एशिया एक महत्वपूर्ण बाजार होने के साथ-साथ ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से भी अहम क्षेत्र है।
रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य भी एजेंडे में
प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत में केवल आर्थिक मुद्दे ही नहीं होंगे। रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके साथ ही डिजिटल कनेक्टिविटी और विकास सहयोग पर भी विचार-विमर्श किया जा सकता है।
स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं भी मौजूद हैं। भारतीय फार्मा उद्योग की वैश्विक मौजूदगी को देखते हुए उज्बेकिस्तान के साथ इस क्षेत्र में साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभकारी हो सकती है।
इसके अलावा शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने से जुड़े विषय भी प्रधानमंत्री के एजेंडे में शामिल बताए जा रहे हैं।
उज्बेकिस्तान के साथ रिश्ते, सेंट्रल एशिया में भारत की रणनीति
प्रधानमंत्री मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत सेंट्रल एशिया के देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इस क्षेत्र में व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और कनेक्टिविटी भारत के लिए प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।
प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को लेकर भी बातचीत हो सकती है। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के लिए यह दौरा महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान के बाद किर्गिस्तान भी जाएंगे। ऐसे में पूरी यात्रा को सेंट्रल एशिया के साथ भारत के व्यापक जुड़ाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस दौरे से निवेश, संसाधन, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
दिनांक: 29 अगस्त 2026 | digitallivenews.com