
Rreport By: Kiran Prakash Singh
5140 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर टूटने से बर्फ, चट्टान और मलबे का सैलाब आया। 7 मिनट में 20 KM दूर गिरॉन्ग पोर्ट पहुंचा, रफ्तार 180 KM/H रही।
29 अगस्त 2026 | digitallivenews.com
नेपाल सैलाब की चेन रिएक्शन: 5140 मीटर से टूटा ग्लेशियर
5140 मीटर पर टूटा ग्लेशियर
नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के पीछे हिमालय में ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई घटनाओं की खतरनाक कड़ी सामने आई। करीब 5140 मीटर की ऊंचाई से बर्फ, चट्टान और मलबा तेजी से नीचे आया और विशाल सैलाब में बदल गया।
नदियों में पहुंचते ही बढ़ा कहर
बर्फ और मलबा पहले लहेंदे खोला नदी में पहुंचा और फिर भोटे कोशी नदी में जा मिला। इससे टिमुरे और रसुवागढ़ी जैसे इलाके प्रभावित हुए। आगे यह प्रवाह त्रिशूली और नारायणी नदी तंत्र से होकर भारत की गंडक नदी की ओर बढ़ा।
7 मिनट में 20 KM का सफर
ग्लेशियर टूटने की घटना करीब 10:52 बजे हुई, जबकि गिरॉन्ग पोर्ट तक सैलाब करीब 10:59 बजे पहुंच गया। यानी लगभग सात मिनट में 20 किलोमीटर का सफर तय हुआ। इसकी अनुमानित रफ्तार 50 मीटर प्रति सेकेंड यानी 180 KM/H रही।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ता खतरा
ग्लेशियरों के पिघलने, पर्माफ्रॉस्ट कमजोर होने और चट्टानों में पानी जाने से ऊंचे हिमालय में अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि हर ग्लेशियर टूटने को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ना उचित नहीं है।
47 ग्लेशियल झीलों पर निगरानी
ICIMOD के अनुसार नेपाल में 21 संभावित खतरनाक ग्लेशियल झीलें हैं। तिब्बत में 25 और भारत में एक ट्रांसबाउंड्री झील भी चिन्हित है। कुल 47 संभावित खतरनाक ग्लेशियल झीलों पर निगरानी जरूरी है, क्योंकि इनके बदलाव से नीचे बसे इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।