
Report By: Kiran Praksh Singh
नेपाल-तिब्बत सीमा पर विनाशकारी बाढ़ से नेपाल में 579 मौतें और 1,924 लोग लापता हैं। तिब्बत में 5 मौतों की पुष्टि के बीच सूचना को लेकर सवाल उठे हैं।
तारीख: 29 अगस्त 2026
Digital Live News | digitallivenews.com
नेपाल-तिब्बत बाढ़ में आंकड़ों का बड़ा अंतर
नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को झकझोर दिया है। नेपाल की ओर से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,924 लोग अब भी लापता हैं। दूसरी ओर, चीनी अधिकारियों ने तिब्बत में पांच लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। इस अंतर ने प्रभावित क्षेत्र में नुकसान के वास्तविक पैमाने को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
नेपाल में तबाही का बड़ा पैमाना
नेपाल के कई इलाकों में बाढ़ और मलबे ने गांवों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कई स्थानों पर संपर्क मार्ग टूट जाने से अभियान मुश्किल हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस के मुताबिक करीब 93 हजार लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं और उन्हें तत्काल सहायता की जरूरत है। कई इलाकों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
1,924 लोग अब भी लापता
नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार लापता लोगों में आम नागरिकों के साथ विदेशी नागरिक और पनबिजली परियोजनाओं में काम करने वाले लोग भी शामिल हैं। अकेले 933 हाइड्रोपावर कर्मियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा 517 विदेशी नागरिक भी लापता लोगों की सूची में शामिल हैं।
बचाव अभियान लगातार जारी है। कई दुर्गम इलाकों में सड़क और पुल बह जाने के कारण जमीनी टीमों की पहुंच सीमित है। ऐसे में हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामान पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
तिब्बत में पांच मौतों की पुष्टि
चीन की ओर से तिब्बत में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। इसके अलावा 558 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। यह आंकड़ा नेपाल में हुई मौतों की तुलना में काफी कम है।
इसी वजह से तिब्बत में नुकसान के वास्तविक स्तर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केवल अलग-अलग मृतक आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि चीन ने निश्चित रूप से मौतों की संख्या छिपाई है। प्रभावित इलाकों की पहुंच, संचार व्यवस्था और बचाव अभियान की स्थिति भी आंकड़ों में अंतर का कारण हो सकती है।
तिब्बत से जानकारी जुटाना क्यों मुश्किल?
तिब्बत में स्वतंत्र पत्रकारिता और स्थानीय स्तर पर सूचना जुटाने की परिस्थितियां नेपाल की तुलना में अलग हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की पहुंच सीमित होने के कारण वहां से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी हासिल करना कठिन हो सकता है।
द गार्जियन की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि चीन की ओर सूचना पर नियंत्रण तिब्बत में बाढ़ के नुकसान का स्वतंत्र आकलन मुश्किल बनाता है। रिपोर्टों में राहत और बचाव गतिविधियों की जानकारी सामने आई है, लेकिन व्यापक तबाही का आकलन करना आसान नहीं है।
बाढ़ की वजह बनी ग्लेशियर से जुड़ी घटना
वैज्ञानिक और सरकारी एजेंसियां इस आपदा की वजहों की जांच कर रही हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार हिमालय में करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद भारी मात्रा में पानी, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया। इससे नदी में अचानक जलस्तर बढ़ा और नेपाल के कई इलाकों में विनाशकारी बाढ़ आई।
इस आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों और अचानक आने वाली बाढ़ के बढ़ते खतरे को सामने ला दिया है। फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, घायलों की मदद और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की है।
नेपाल में बचाव अभियान जारी है और आने वाले दिनों में लापता लोगों तथा नुकसान का आंकड़ा बदल सकता है। इसलिए नेपाल और तिब्बत के आंकड़ों की तुलना करते समय आधिकारिक अपडेट और स्वतंत्र रूप से सत्यापित सूचनाओं को ध्यान में रखना जरूरी है।