पीओपी गणेश मूर्तियों पर नए नियम: विसर्जन केवल कृत्रिम झील में, मूर्ति पर लाल निशान अनिवार्य

Report By: Kiran Prakash Singh

पीओपी गणेश मूर्तियों पर सख्ती: राज्य सरकार ने जारी किए नए दिशा-निर्देश, मूर्ति पर लाल निशान और कृत्रिम झील में विसर्जन अनिवार्य

मुंबई (DigitalLiveNews), 2 अगस्त 2025 — बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी बड़ी गणेश मूर्तियों के समुद्र में विसर्जन को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दिए जाने के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने मूर्तियों से जुड़े नए सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। ये नियम मार्च 2026 तक सभी त्योहारों पर लागू रहेंगे।

मूर्तियों पर लाल निशान अनिवार्य

पर्यावरण विभाग द्वारा 1 अगस्त को जारी आदेश के अनुसार, सभी पीओपी मूर्तियों के पीछे लाल रंग का गोल निशान लगाना अनिवार्य होगा। यह निशान तेल के रंग से स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला होना चाहिए ताकि मूर्ति की पहचान आसानी से की जा सके।

मूर्ति निर्माताओं और विक्रेताओं को:

  • मूर्ति की बिक्री का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।

  • स्थानीय निकायों से लाइसेंस लेते समय इन शर्तों का पालन करना जरूरी होगा।

  • स्थानीय निकाय यह सुनिश्चित करें कि मूर्ति विक्रेताओं को दिशा-निर्देशों की जानकारी हो और वे उनका सख्ती से पालन करें।

विसर्जन के नए नियम क्या हैं?

  • 6 फीट से छोटी मूर्तियों का विसर्जन केवल कृत्रिम झीलों में ही किया जाएगा।

  • 6 फीट से बड़ी मूर्तियाँ सिर्फ तभी प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जित की जा सकेंगी जब अन्य कोई विकल्प न हो।

    • विसर्जन के अगले दिन अवशेषों की सफाई और वैज्ञानिक पुनर्चक्रण की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की होगी।

कृत्रिम झीलों और पुनर्चक्रण की व्यवस्था

  • सभी स्थानीय निकाय विसर्जन के लिए कृत्रिम झीलें स्थापित करेंगे।

  • झीलों का पानी 7 दिनों में फिटकरी या चूने से साफ करके एसटीपी/ईटीपी में भेजा जाएगा।

  • झीलों में जमा गाद को कम से कम 15 दिनों तक सुरक्षित रूप से संग्रहित कर पुनर्चक्रण के लिए भेजा जाएगा।

    • इसके लिए राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (NCL) या राजीव गांधी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आयोग से साझेदारी की जाएगी।

जन जागरूकता और निगरानी

  • हर शहर में जन जागरूकता, निर्देश बोर्ड, और विसर्जन योजना के लिए एक अलग तंत्र बनाया जाएगा।

  • सार्वजनिक मंडलों को मूर्ति पंजीकरण के समय यह उल्लेख करना होगा कि मूर्ति पीओपी की है या नहीं।

  • बड़ी मूर्तियों के पुन: उपयोग या छोटी प्रतिकृतियों के इस्तेमाल की सलाह दी गई है।

  • महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करेगा और उसे वेबसाइट पर अपलोड करेगा।

साथ ही, सोशल मीडिया, अखबारों और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का अभियान भी चलाया जाएगा ताकि पर्यावरण की सुरक्षा के साथ-साथ पारंपरिक आस्था को भी संतुलित किया जा सके।

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