
Report By: Kiran Prakash Singh
करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने DMK की याचिका खारिज कर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की यात्रा पर रोक से इनकार किया और अदालत को राजनीतिक मंच न बनाने की नसीहत दी।
करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट की दोटूक, विजय की यात्रा पर रोक से इनकार
तमिलनाडु के चर्चित करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) को राहत दी है। अदालत ने डीएमके की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मुख्यमंत्री विजय की करूर यात्रा पर रोक लगाने और राज्य के मंत्रियों को सार्वजनिक बयान देने से रोकने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने स्पष्ट कहा कि न्यायालय किसी मुख्यमंत्री की राजनीतिक या प्रशासनिक गतिविधियों को नियंत्रित नहीं करेगा। अदालत ने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों और बयानबाजी का समाधान अदालत में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और राजनीतिक मंचों पर होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की खारिज
जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान डीएमके की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि वह किसी मुख्यमंत्री को पीड़ित परिवारों से मिलने से नहीं रोक सकती।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि करूर भगदड़ मामले की एफआईआर में मुख्यमंत्री विजय आरोपी नहीं हैं। इसलिए उनकी यात्रा पर रोक लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।
पीड़ित परिवारों से मिलने जाएंगे विजय
मुख्यमंत्री विजय ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिजनों से मिलने का निर्णय लिया है। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है।
इसी प्रस्तावित दौरे को लेकर डीएमके ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और आरोप लगाया था कि इससे मामले की जांच प्रभावित हो सकती है।
डीएमके ने जांच प्रभावित होने की जताई आशंका
डीएमके ने अपनी याचिका में कहा कि 27 सितंबर 2025 को हुई इस दुखद घटना की जांच पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई को सौंपी जा चुकी है। साथ ही जांच की निगरानी के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में समिति भी गठित की गई थी।
पार्टी का आरोप था कि सत्ता में आने के बाद टीवीके और उसके नेताओं के सार्वजनिक बयान जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं।
कोर्ट ने राजनीतिक लड़ाई पर दी नसीहत
सुनवाई के दौरान डीएमके की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। हालांकि पीठ उनकी दलीलों से सहमत नहीं दिखी।
जस्टिस के. वी. विश्वनाथन ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल का नेता बयान देता है तो दूसरा दल उसका जवाब राजनीतिक मंच पर दे सकता है। अदालत को राजनीतिक संघर्ष का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेदों का समाधान जनता और राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, न कि न्यायालय के जरिए।
फैसले के राजनीतिक मायने
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि जब तक कोई प्रत्यक्ष कानूनी उल्लंघन या जांच में बाधा का ठोस आधार न हो, तब तक राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने का प्रश्न नहीं उठता।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस टिप्पणी से भविष्य में राजनीतिक मामलों में न्यायालय की भूमिका को लेकर भी एक स्पष्ट संदेश गया है कि अदालतें राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मंच नहीं बन सकतीं।
निष्कर्ष
करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके की याचिका खारिज करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को राहत दी है। अदालत ने साफ कहा कि किसी मुख्यमंत्री के दौरे या राजनीतिक बयानों पर रोक लगाने का आदेश देना न्यायालय का कार्य नहीं है। साथ ही कोर्ट ने राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक मर्यादा में रहकर अपने मतभेद सुलझाने की सलाह दी। इस फैसले के बाद अब मुख्यमंत्री विजय का करूर दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार होने की संभावना है।
नोट: यह समाचार न्यायालय में हुई कार्यवाही और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। मामले की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा जारी है।
📅 दिनांक: 7 जुलाई 2026
🌐 रिपोर्ट: Digitallivenews.com