
Report By: Kiran Prakash Singh
भड़काऊ भाषण और अमित शाह को कथित धमकी देने के आरोप में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बंगाल में FIR दर्ज हुई है।
बंगाल में बड़ा राजनीतिक विवाद, अभिषेक बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद Abhishek Banerjee के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को कथित तौर पर धमकी देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है।
यह मामला कोलकाता के बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए भाषणों से सामाजिक तनाव बढ़ा और सार्वजनिक शांति प्रभावित हो सकती थी।
एफआईआर दर्ज होने के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और बीजेपी तथा टीएमसी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
क्या हैं अभिषेक बनर्जी पर आरोप?
एफआईआर के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी ने 27 अप्रैल से 3 मई के बीच कई चुनावी सभाओं में ऐसे बयान दिए जो कथित तौर पर भड़काऊ और उकसाने वाले थे। शिकायत में कहा गया है कि इन बयानों से विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ सकती थी और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने का खतरा पैदा हुआ।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ धमकी भरी टिप्पणियां की गईं। पुलिस का कहना है कि मामले में कुछ गंभीर और गैर-जमानती धाराएं भी लगाई गई हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, चुनावी मंचों पर दिए गए भाषणों के वीडियो और ऑनलाइन लिंक भी सबूत के तौर पर जमा कराए गए हैं।
किसने दर्ज कराई शिकायत?
यह शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सरकार की ओर से दर्ज कराई गई थी। उन्होंने चुनाव नतीजे आने के एक दिन बाद यानी 5 मई को बागुईहाटी पुलिस स्टेशन में शिकायत दी थी।
बाद में मामला बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर किया गया, जहां 15 मई को दोपहर 2:45 बजे औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज की गई।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी के भाषणों में ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया गया जिससे तनाव और हिंसा भड़क सकती थी। साथ ही उन्होंने कई वीडियो लिंक और रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपीं।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की कई धाराओं के तहत दर्ज किया है। इनमें धारा 192, 196, 351(2) और 353(1)(c) शामिल हैं। इसके अलावा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(2) और 125 भी लगाई गई हैं।
इन धाराओं में दंगा भड़काने, समूहों के बीच नफरत फैलाने, धमकी देने और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसे आरोप शामिल हैं।
एफआईआर के अनुसार, सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित तौर पर आक्रामक भाषा का प्रयोग किया गया था। पुलिस अब भाषणों की रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया सामग्री की जांच कर रही है।
जांच की जिम्मेदारी किसे मिली?
इस पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर सोमनाथ रॉय को सौंपी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि भाषणों का वास्तविक प्रभाव क्या पड़ा और क्या उनसे कानून-व्यवस्था पर असर पड़ा था।
जांच अधिकारी डिजिटल सबूतों, वीडियो क्लिप्स और सोशल मीडिया पोस्ट की भी पड़ताल करेंगे। जरूरत पड़ने पर गवाहों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और ज्यादा राजनीतिक रंग ले सकता है क्योंकि बंगाल में सत्ता और विपक्ष के बीच तनाव पहले से ही काफी बढ़ा हुआ है।
बंगाल की राजनीति में फिर बढ़ा टकराव
एफआईआर दर्ज होने के बाद बीजेपी और टीएमसी आमने-सामने आ गए हैं। बीजेपी इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई बता रही है, जबकि टीएमसी समर्थकों का कहना है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
चुनाव के बाद बंगाल में लगातार राजनीतिक तनाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में अभिषेक बनर्जी पर दर्ज यह मामला राज्य की राजनीति को और गर्मा सकता है।
अब सबकी नजर पुलिस जांच और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी है। अगर जांच आगे बढ़ती है तो यह मामला राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।