क्रूड ऑयल में फिर उबाल, ट्रंप के फैसले से बढ़ी चिंता

Report By: Kiran Prakash Singh

अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आई। ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर के करीब पहुंचा, वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई।

📅 दिनांक: 09 जुलाई 2026
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अमेरिका-ईरान तनाव से फिर उछला क्रूड ऑयल, 80 डॉलर के करीब पहुंचीं कीमतें

वैश्विक बाजार में फिर बढ़ी हलचल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब ग्लोबल ऑयल मार्केट पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाने और शांति समझौते को समाप्त करने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली, जिससे ऊर्जा बाजारों के साथ-साथ वैश्विक निवेशकों की चिंता भी बढ़ गई है।


ब्रेंट और WTI क्रूड में आई तेजी

ताजा कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 78.80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं WTI (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) क्रूड भी लगभग 74.26 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव जारी रहता है, तो कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी छू सकती हैं।

भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में भी जुलाई फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में तेज उछाल दर्ज किया गया और कारोबार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ।


तेजी की सबसे बड़ी वजह क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल के परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसके अलावा, अमेरिका द्वारा ईरान के तेल निर्यात से जुड़ी कुछ रियायतों को वापस लेने की खबरों ने भी वैश्विक बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। निवेशकों को आशंका है कि यदि आपूर्ति प्रभावित होती है तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।


होर्मुज मार्ग पर बढ़ी चिंता

रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण कुछ तेल टैंकर और एलएनजी जहाज वैकल्पिक समुद्री मार्गों का उपयोग कर रहे हैं। इससे परिवहन लागत और डिलीवरी समय दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

सऊदी अरब, कुवैत, इराक, ईरान और अन्य खाड़ी देशों के ऊर्जा निर्यात के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ सकता है।


आगे क्या रह सकती है स्थिति?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें काफी हद तक अमेरिका-ईरान संबंधों, सैन्य गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों पर निर्भर करेंगी। यदि तनाव कम होता है तो कीमतों में नरमी आ सकती है, जबकि संघर्ष बढ़ने की स्थिति में तेल और महंगा हो सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पेट्रोल, डीजल, परिवहन लागत और महंगाई पर भी पड़ सकता है। इसलिए निवेशकों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम और ऊर्जा बाजार की अगली चाल पर टिकी हुई है।

नोट: कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बदलती रहती हैं। ऊपर दिए गए मूल्य उपलब्ध बाजार आंकड़ों के आधार पर तैयार किए गए हैं और समय के साथ इनमें बदलाव संभव है।

📅 दिनांक: 09 जुलाई 2026
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