मोहन भागवत के बयान पर ओवैसी का पलटवार, RSS पर साधा निशाना

Report By:  Kiran Prakash Singh

न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के बयान पर असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने RSS की विचारधारा, आजादी की लड़ाई और सांप्रदायिक सद्भाव पर सवाल उठाए।

आगरा | 31 अगस्त 2026 | digitallivenews.com

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मोहन भागवत के बयान पर ओवैसी का पलटवार, RSS पर उठाए सवाल

अमेरिका के न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की ओर से विविधता में एकता और मानव समानता को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। हैदराबाद से AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भागवत के बयान पर निशाना साधते हुए RSS की विचारधारा और उसके ऐतिहासिक रुख को लेकर कई सवाल उठाए हैं। ओवैसी ने कहा कि RSS प्रमुख की ओर से विदेश में दिए जाने वाले बयानों और संगठन के भीतर कही जाने वाली बातों में अंतर दिखाई देता है।

न्यूयॉर्क में भागवत ने दिया था एकता का संदेश

मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित कार्यक्रम में भारत की विविधता का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि भारत में अलग-अलग भाषाएं, धर्म और जीवनशैलियां होने के बावजूद विविधता में एकता देश की पहचान है।

भागवत ने भारत की भूमिका को दुनिया के सामने एकता और मानवता का संदेश देने से भी जोड़ा। उनके बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

ओवैसी ने RSS की विचारधारा पर उठाए सवाल

असदुद्दीन ओवैसी ने भागवत के बयान को लेकर कहा कि RSS की ओर से विदेश में कही गई बातों को संगठन की पुरानी विचारधारा के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी दुनिया के लिए दिए जाने वाले भाषण और संगठन के सदस्यों के बीच होने वाली चर्चा में अंतर रहा है।

ओवैसी का कहना है कि केवल बयान देने से सामाजिक सद्भाव स्थापित नहीं होता, बल्कि उसके लिए जमीनी स्तर पर समानता और भाईचारे को बढ़ावा देना भी जरूरी है।

आजादी की लड़ाई का भी किया जिक्र

AIMIM प्रमुख ने अपने बयान में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के कांग्रेस से जुड़े रहने और बाद में संगठन की स्थापना करने के इतिहास का हवाला दिया।

ओवैसी ने दावा किया कि उस दौर में महात्मा गांधी सभी धार्मिक समुदायों को एक साथ लेकर स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे थे। उन्होंने इसी संदर्भ में RSS के ऐतिहासिक रुख पर सवाल उठाए।

हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सद्भाव पर सवाल

ओवैसी ने कहा कि अगर देश में वास्तव में सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत करना है तो सभी समुदायों को समान सम्मान और अधिकार मिलना जरूरी है। उन्होंने मुस्लिम और ईसाई समुदायों से जुड़े विभिन्न मुद्दों का उल्लेख करते हुए RSS की विचारधारा पर सवाल खड़े किए।

उन्होंने धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनों और समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भी अपनी आपत्तियां रखीं। ओवैसी ने सवाल किया कि अलग-अलग समुदायों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे सुनिश्चित किया जा रहा है।

बयान से फिर तेज हुई राजनीतिक बहस

मोहन भागवत के न्यूयॉर्क संबोधन के बाद शुरू हुई राजनीतिक बहस अब भारत में भी चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर भागवत ने एकता, विविधता और मानवता को भारत की पहचान बताया, वहीं ओवैसी ने RSS की विचारधारा और उसके व्यवहार को लेकर सवाल उठाए हैं।

इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों की राजनीतिक व्याख्याएं अलग-अलग हैं। भागवत के बयान को जहां समर्थक भारत की समावेशी सोच के संदेश के रूप में देख रहे हैं, वहीं ओवैसी जैसे विपक्षी नेता इसे संगठन की ऐतिहासिक और वर्तमान विचारधारा के संदर्भ में परखने की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस में और प्रमुखता से उठ सकता है।

स्रोत: उपलब्ध समाचार सामग्री | डिजिटल लाइव न्यूज़
दिनांक: 31 अगस्त 2026 | digitallivenews.com

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