E20 पेट्रोल पर SC का बड़ा अपडेट, याचिका हाई कोर्ट भेजी

Report By: Kiran Prakash Singh

E20 पेट्रोल की बिक्री और एथेनॉल की मात्रा बताने की मांग वाली याचिका पर SC ने सुनवाई से इनकार किया। याचिकाकर्ता को पहले हाई कोर्ट जाने को कहा।

नई दिल्ली | 31 अगस्त 2026 | digitallivenews.com

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E20 पेट्रोल पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा अपडेट, जानिए याचिका में क्या थी मांग

E20 पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सोमवार को बड़ा अपडेट सामने आया। अदालत ने इस मामले में सीधे सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को पहले हाई कोर्ट जाने की सलाह दी। याचिका में E20 पेट्रोल की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग नहीं की गई थी, बल्कि उपभोक्ताओं को पेट्रोल में मौजूद एथेनॉल की मात्रा की स्पष्ट जानकारी देने और इसके प्रभावों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की गई थी।

एथेनॉल की मात्रा बताने की थी मांग

याचिकाकर्ता का कहना था कि पेट्रोल खरीदने वाले उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उन्हें मिलने वाले ईंधन में कितना एथेनॉल मिला हुआ है। उनका दावा था कि पेट्रोल पंप पर उपलब्ध जानकारी और बिल में एथेनॉल की मात्रा स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होती।

याचिका में मांग की गई थी कि पेट्रोल पंप के डिस्पेंसिंग नोजल और बिल पर एथेनॉल की मात्रा साफ तौर पर लिखी जाए, ताकि ग्राहक ईंधन के बारे में पूरी जानकारी के साथ फैसला ले सकें।

पुरानी गाड़ियों के लिए अलग विकल्प की मांग

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के प्रभावों की वैज्ञानिक और निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। खासतौर पर पुराने वाहनों के इंजन, माइलेज और रखरखाव पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किए जाने की मांग की गई।

याचिका में यह सुझाव भी दिया गया कि यदि संभव हो तो पुराने वाहनों के लिए कम एथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए। याचिकाकर्ता का तर्क था कि अलग-अलग उम्र और तकनीक वाले वाहनों पर ईंधन के प्रभाव अलग हो सकते हैं।

जस्टिस एमएम सुंदरेश की बेंच में हुई सुनवाई

मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच के सामने हुई। याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने पेट्रोल पंप की रसीद भी रखी और दावा किया कि उसमें एथेनॉल की मात्रा स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि यह केवल किसी एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों पेट्रोल उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़ा सवाल है। उनके मुताबिक ग्राहक को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि वह किस प्रकार का ईंधन खरीद रहा है।

अटॉर्नी जनरल ने याचिका का विरोध किया

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता की मांग मूल रूप से भारत सरकार से जवाब मांगने जैसी है।

अटॉर्नी जनरल ने इस याचिका को ‘प्रॉक्सी याचिका’ बताते हुए कहा कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट इसी तरह के मामले से जुड़ी एक याचिका खारिज कर चुका है। सरकार की ओर से इस आधार पर भी अदालत से याचिका पर विचार नहीं करने का आग्रह किया गया।

SC ने हाई कोर्ट जाने को कहा

याचिकाकर्ता ने अपनी ओर से कहा कि यह उनका निजी मामला नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकार से संबंधित व्यापक मुद्दा है। हालांकि, सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 32 के तहत सीधे इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

अदालत ने याचिकाकर्ता को पहले संबंधित हाई कोर्ट में अपनी बात रखने के लिए कहा। इसका मतलब यह है कि E20 पेट्रोल को लेकर उठाए गए सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

अब याचिकाकर्ता के पास हाई कोर्ट का रुख करने का विकल्प है। वहां वह पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल की मात्रा की जानकारी, उपभोक्ता अधिकारों और पुराने वाहनों के लिए ईंधन विकल्प जैसे मुद्दों को उठा सकता है।

E20 पेट्रोल को लेकर यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ईंधन की जानकारी, उपभोक्ता अधिकार और वाहनों पर संभावित प्रभाव जैसे कई मुद्दे शामिल हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस विवाद की अगली कानूनी लड़ाई हाई कोर्ट में देखने को मिल सकती है।

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