
Report By: Kiran Prakash Singh
RBI 10 और 20 रुपये के 200 करोड़ प्लास्टिक नोट लाने की तैयारी में है। टेंडर में सुरक्षा, चीन-पाक से अलग संचालन और पशु चर्बी रहित शर्तें हैं।
नई दिल्ली | 31 अगस्त 2026 | digitallivenews.com
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10-20 रुपये के प्लास्टिक नोट जल्द! RBI ने शुरू की तैयारी
भारतीय करेंसी को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की सब्सिडियरी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने 10 और 20 रुपये के पॉलीमर यानी प्लास्टिक बैंकनोट की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। इसके तहत इनबिल्ट सिक्योरिटी फीचर्स वाली पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की सप्लाई के लिए भारतीय और विदेशी कंपनियों से बोली आमंत्रित की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित योजना में करीब 200 करोड़ प्लास्टिक नोट तैयार किए जाने की बात सामने आई है। पॉलीमर नोट कागज के मुकाबले अधिक टिकाऊ और पानी आदि के प्रति बेहतर प्रतिरोध वाले माने जाते हैं।
पॉलीमर नोट लाने की दिशा में बड़ा कदम
BRBNMPL ने पॉलीमर करेंसी के लिए ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी EOI जारी किया था। इसकी निर्धारित समयसीमा 18 अगस्त बताई गई है। प्रक्रिया में विदेशी पॉलिमर करेंसी निर्माता कंपनियों के साथ भारतीय कंपनियों ने भी रुचि दिखाई है।
बताया गया है कि ब्रिटेन की बैंकनोट निर्माता कंपनी डी ला रू (De La Rue) के साथ साझेदारी में काम करने वाली एक भारतीय कंपनी ने भी बोली लगाई है। इससे भारत में पॉलीमर करेंसी की संभावित शुरुआत को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
चीन और पाकिस्तान से अलग संचालन की शर्त
टेंडर प्रक्रिया में राष्ट्रीय सुरक्षा और सप्लाई चेन से जुड़े पहलुओं को भी महत्व दिया गया है। कंपनियों को कई तरह के दस्तावेज और समझौते प्रस्तुत करने होंगे।
इनमें सत्यनिष्ठा समझौता, गोपनीयता अनुबंध और एजेंट-मुक्त समझौता शामिल हैं। इसके अलावा कंपनियों को यह सुनिश्चित करने का वचन देना होगा कि भारत में उनका संचालन चीन और पाकिस्तान में मौजूद उनके संचालन से पूरी तरह अलग रहेगा।
इस शर्त का उद्देश्य पॉलीमर बैंकनोट की आपूर्ति और निर्माण से जुड़ी संवेदनशील प्रक्रिया को अलग और सुरक्षित रखना बताया गया है।
नोटों में पशु चर्बी नहीं होने की शर्त
पॉलीमर सब्सट्रेट को लेकर एक और महत्वपूर्ण शर्त सामने आई है। बोली लगाने वाली कंपनियों को प्रमाणित करना होगा कि BRBNMPL को उपलब्ध कराए जाने वाले पॉलीमर सब्सट्रेट में जानवरों की चर्बी या उसका DNA मौजूद नहीं होगा।
विदेशों में बैंकनोट निर्माण में इस्तेमाल होने वाली कुछ सामग्रियों को लेकर पहले विवाद सामने आ चुके हैं। इसी पृष्ठभूमि में भारत में पॉलीमर करेंसी की सामग्री को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है।
68 हजार रीम पॉलीमर सब्सट्रेट की जरूरत
BRBNMPL के दस्तावेजों में भारतीय बैंकनोटों की छपाई के लिए लगभग 68,000 रीम पॉलीमर सब्सट्रेट की जरूरत बताई गई है। प्रत्येक रीम में पॉलीमर फिल्म की 500 शीट होने की बात कही गई है।
कंपनियों को बोली के साथ अपने उत्पाद के सैंपल भी उपलब्ध कराने होंगे। इन सैंपलों की अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में टेस्टिंग की जाएगी। परीक्षण में योग्य पाए जाने वाले आपूर्तिकर्ताओं को आगे की टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
ज्यादा टिकाऊ करेंसी का विकल्प
पॉलीमर बैंकनोटों को सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ, साफ-सुथरा और सुरक्षित विकल्प माना जाता है। इन नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों की चुनौती से निपटने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, अभी यह प्रक्रिया शुरुआती और चयन चरण में है। इसलिए बाजार में 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट कब से नियमित रूप से उपलब्ध होंगे, इसकी अंतिम तारीख स्पष्ट नहीं है।
यदि योजना आगे बढ़ती है तो भारत की करेंसी व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। पॉलीमर नोटों की मजबूती, सुरक्षा और लंबे समय तक चलने की क्षमता के कारण आने वाले समय में छोटे मूल्यवर्ग के नोटों के लिए इनके इस्तेमाल का दायरा बढ़ सकता है।
डिजिटल लाइव न्यूज़ | 31 अगस्त 2026
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