
Report By: Kiran Prakash Singh
संसद के मानसून सत्र में गतिरोध जारी है। झारखंड लाठीचार्ज को लेकर BJP ने विपक्ष को घेरा, वहीं FCRA, महिला आरक्षण और परिसीमन बिल अटके।
संसद में संग्राम तेज, तीन अहम बिलों पर संकट
डिजिटल लाइव न्यूज़ | 11 अगस्त 2026 | digitallivenews.com
संसद के मानसून सत्र का आखिरी सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को संसद परिसर में NDA और विपक्षी सांसद आमने-सामने नजर आए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस बीच झारखंड में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा बीजेपी के लिए विपक्ष को घेरने का नया हथियार बन गया है।
संसद का मौजूदा मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलना है। ऐसे में अब केवल कुछ ही दिन बचे हैं और तीन महत्वपूर्ण मुद्दों—महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA संशोधन—पर सरकार के रुख को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
संसद परिसर में आमने-सामने आए सत्ता पक्ष और विपक्ष
मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष की मांग है कि दिल्ली में Gen-Z आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जवाब दें। इसके अलावा विपक्ष राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोपों पर भी चर्चा की मांग कर रहा है।
हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों को नसीहत दी और कहा कि देश सदन की कार्यवाही को देख रहा है। इसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।
वहीं, कार्यवाही शुरू होने से पहले NDA सांसदों ने संसद परिसर तक मार्च निकाला। उनके हाथों में पोस्टर थे और वे राहुल गांधी जवाब दो तथा अन्य नारे लगाते नजर आए।
विपक्ष ने भी सरकार पर साधा निशाना
NDA सांसदों के प्रदर्शन के जवाब में विपक्षी सांसदों ने भी संसद परिसर में प्रदर्शन किया। विपक्ष की ओर से अमित शाह जवाब दो और राम मंदिर चंदे से जुड़े सवालों को लेकर नारे लगाए गए।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सत्ता पक्ष के सांसदों के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार के सांसदों को प्रदर्शन करते हुए उन्होंने पहली बार देखा है। उन्होंने सरकार से सदन में आकर सवालों के जवाब देने की मांग की।
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने शिक्षा, परीक्षा और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जरूरत बताई। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मामलों को गंभीरता से सदन में उठाया जाना चाहिए।
झारखंड लाठीचार्ज बना BJP का नया मुद्दा
संसद के अंदर चल रही राजनीतिक लड़ाई के बीच झारखंड में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज ने बीजेपी को विपक्ष पर हमला करने का नया मौका दिया है। झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में कांग्रेस, JMM और लेफ्ट गठबंधन की सरकार है।
राहुल गांधी ने झारखंड में हुए लाठीचार्ज की आलोचना की थी। अब बीजेपी इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साध रही है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि राहुल गांधी अलग-अलग राज्यों में कानून-व्यवस्था के मामलों को लेकर दोहरा मापदंड अपनाते हैं।
बीजेपी नेता तरुण चुग और मनोज तिवारी ने भी इस मुद्दे पर राहुल गांधी से सवाल पूछे। बीजेपी का कहना है कि यदि विपक्ष दूसरे राज्यों में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाता है तो उसे झारखंड में हुई कार्रवाई पर भी जवाब देना चाहिए।
FCRA, महिला आरक्षण और परिसीमन पर संशय
मानसून सत्र में अब बेहद कम समय बचा है। ऐसे में तीन बड़े विधायी प्रस्तावों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इनमें महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA संशोधन से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।
सरकार ने इन मुद्दों पर समर्थन जुटाने की कोशिश की थी। कुछ विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर अपने रुख में नरमी के संकेत भी दिए थे। हालांकि कांग्रेस और उसके कई सहयोगी दल इन प्रस्तावों तथा FCRA संशोधन बिल का विरोध करने की बात कह चुके हैं।
परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव में 2029 के बाद लोकसभा क्षेत्रों और महिला आरक्षण की व्यवस्था में बदलाव का प्रावधान बताया गया है। वहीं FCRA संशोधन विधेयक 2026 इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। अभी इस पर चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया बाकी है।
आखिरी तीन दिनों में क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संसद के बचे हुए दिनों में सरकार इन महत्वपूर्ण बिलों को आगे बढ़ा पाएगी या फिर लगातार जारी हंगामे के कारण ये प्रस्ताव अगले सत्र तक टल जाएंगे।
सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने मुद्दों पर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। एक तरफ विपक्ष दिल्ली लाठीचार्ज और राम मंदिर चंदे के मुद्दे पर चर्चा चाहता है, तो दूसरी ओर बीजेपी झारखंड की घटना को लेकर विपक्ष को घेर रही है।
ऐसे में मानसून सत्र के अंतिम दिनों में संसद की कार्यवाही बेहद हंगामेदार और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहने की संभावना है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार FCRA, महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े प्रस्तावों को लेकर क्या फैसला करती है।