
Report By: Kiran Praaksh Singh
सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रोटेस्ट हिंसा मामले में कहा कि गंभीर अपराध में शामिल लोगों को राहत नहीं मिलेगी। सरकार, छात्रों और पुलिस से जुड़े सभी पक्षों पर सुनवाई जारी है।
NEET प्रोटेस्ट हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, गंभीर आरोपियों को राहत नहीं
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने NEET प्रोटेस्ट के दौरान हुई हिंसा पर स्पष्ट कहा कि गंभीर अपराध में शामिल लोगों को किसी भी तरह की राहत नहीं मिलेगी। CJI ने कहा कि यह देखा जाएगा कि कितनी FIR दर्ज हुई हैं, किन लोगों का आपराधिक इतिहास है और किन मामलों में कार्रवाई वापस लेने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
सरकार ने क्या कहा?
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार छात्रों पर कार्रवाई नहीं चाहती और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि छात्रों की आड़ में घुसे अपराधी तत्वों को राहत नहीं दी जा सकती। सरकार ने बताया कि 2738 लोगों की पहचान की गई है, जिनके खिलाफ गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।
वकीलों ने उठाए अहम सवाल
वृंदा ग्रोवर ने कहा कि छोटे अपराधों में फंसे छात्रों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। गोपाल शंकरनारायण ने सवाल उठाया कि प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग क्यों किया गया और बिना वर्दी वाले लोग कौन थे। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कुछ मामलों में राजनीतिक कारणों से भी मुकदमे दर्ज हुए हैं।
फेस रिकॉग्निशन और जांच पर बहस
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि फेस रिकॉग्निशन और आधार डेटा के इस्तेमाल की वैधता पर सवाल हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया कि केवल फेस रिकॉग्निशन ही नहीं, बल्कि फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर भी लोगों की पहचान की गई है।
19 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
CJI ने कहा कि छात्रों की आड़ में छिपे अपराधी रियायत के हकदार नहीं हैं, लेकिन यदि किसी पुलिस अधिकारी ने भी अत्यधिक बल प्रयोग किया है तो उसे भी संरक्षण नहीं मिलेगा। अदालत ने पूर्व CJI की जगह किसी पूर्व जज की अध्यक्षता में समिति बनाने पर विचार जताया। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी, जिसमें समिति के गठन, कार्यक्षेत्र और प्रोटोकॉल पर भी फैसला किया जाएगा।
📅 03 अगस्त 2026 | 🌐 digitallivenews.com