UPI चार्ज पर संजय निषाद ने सरकार से पूछे सवाल

Report By: Kiran Prakash Singh

UPI पर ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट भुगतान पर 0.4% MDR के फैसले पर संजय निषाद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे चार्ज से आम जनता पर असर पड़ सकता है।

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UPI चार्ज पर संजय निषाद ने उठाए सवाल

₹2,000 से ज्यादा के पात्र मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने के फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसे चार्ज नहीं बढ़ाए जाने चाहिए और सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन्हें किन परिस्थितियों में लागू किया गया है।

संजय निषाद ने कहा कि महंगाई और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से जुड़े कई मुद्दे पहले से मौजूद हैं। ऐसे में उनका मानना है कि आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र का मतलब लोगों की मुश्किलें कम करना और उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराना बताया।

संजय निषाद ने सरकार से क्या पूछा?

UPI चार्ज को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए संजय निषाद ने सरकार से सवाल किया कि आखिर किन परिस्थितियों में इस तरह का शुल्क लागू करने का फैसला लिया गया। उनके मुताबिक, किसी भी तरह का अतिरिक्त चार्ज अंततः ग्राहकों और आम जनता को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में डिजिटल भुगतान लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। ऐसे में भुगतान व्यवस्था में होने वाले किसी भी बदलाव का असर बड़े स्तर पर पड़ सकता है। संजय निषाद ने जनता की सुविधा और बोझ कम करने को लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्राथमिकता बताया।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR

NPCI के नए ढांचे के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेन-देन पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 और उससे अधिक के लेन-देन के लिए MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।

उदाहरण के तौर पर ₹3,000 के पात्र मर्चेंट भुगतान पर 0.4% की दर से MDR ₹12 होगा। यह शुल्क भुगतान व्यवस्था से जुड़े मर्चेंट और पेमेंट इकोसिस्टम के बीच लागू होता है।

ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा UPI शुल्क

नए नियमों को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राहकों से सीधे UPI ट्रांजैक्शन फीस नहीं ली जाएगी। Person-to-Person यानी P2P भुगतान भी रकम की परवाह किए बिना MDR से मुक्त रहेंगे। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान भी निर्धारित शून्य-MDR व्यवस्था के तहत फ्री रहेंगे।

सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत P2M UPI ट्रांजैक्शन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। MDR को सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं बताया गया है, बल्कि यह पेमेंट इकोसिस्टम में भागीदार संस्थाओं के बीच साझा होने वाला शुल्क है।

जरूरी सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था

नए ढांचे में कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग MDR व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कुछ अन्य आवश्यक क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के पात्र लेन-देन पर 0.4% के बजाय ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।

इसके अलावा म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से जुड़े पूंजी बाजार भुगतान पर 0.02% MDR, अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन की सीमा के साथ लागू होगा। छोटे व्यापारियों को भी राहत दी गई है।

छोटे व्यापारियों को मिलेगी राहत

NPCI के ढांचे में छोटे व्यापारियों के लिए भी शून्य-MDR व्यवस्था रखी गई है। जिन छोटे व्यापारियों की UPI QR के जरिए मासिक प्राप्तियां ₹1 लाख तक हैं, उनके लिए सभी लेन-देन पर अनिवार्य रूप से शून्य MDR की व्यवस्था है।

इस बीच संजय निषाद की प्रतिक्रिया ने UPI के नए MDR ढांचे पर चल रही सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा को और सामने ला दिया है। जहां सरकार इसे UPI इकोसिस्टम को टिकाऊ बनाने की व्यवस्था बता रही है, वहीं संजय निषाद ने जनता पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।

दिनांक: 16 सितंबर 2026
digitallivenews.com

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